अमीर खुसरो की रचनाएँ :- educational dose

नमस्कार दोस्तों आज की पोस्ट में हमने अमीर खुसरो की रचनाएँ ले के आये इस पोस्ट अमीर खुसरो की रचनाएँ आपके पेपर में बहुत पूछा जाता है और यह आठवीं कक्षा से इंटर तक में अक्सर आता है कभी कभी आप कोइ चीज की तैयारी करते हो तो बहुत सारी प्रश्न इससे पूछे जाते हे इस लिए हमने अमीर खुसरो की रचनाएँ लिखी हे जिससे आपको इसके बारे में आसानी से जानकारी मिल जाये l

दिल्ली सल्तनतकालीन अन्य लेखकों में सर्वाधिक उल्लेखनीय में अमीर खुसरो का नाम हैl. देखा जाये तो सही अर्थो वह कोइ इतिहास कर नहीं थे इनका जन्म सन 1253 ई० में हुआ था और ये ऐसे परिवार में पैदा हुए थे जिनकी घनिष्ठ सम्बन्ध राजदरबार पीढ़ियों से रहता था वह हमेशा अलाउद्दीन खिलजी, गयासुद्दीन तुगलक , जलालुद्दीन खिलजी,कैकूबाद,व मुबारकशाह के शाही सेवा के अंतर्गत रहे थे l
सूफियों में अमीर खुसरो –देखा गया की पूर्ण रूप से औलिया निजामुद्दीन के काफी नजदीक रहते थे और इसलिए उन्होंने अपने संगीत व काव्य के माध्यम से भारत के ही सूफी संस्कृति को निर्माण में महान योगदान दिए थे .चलिए जिक्र करते हैं अमीर खुसरो (Amir Khusro) द्वारा रचित किताबों (Books) के बारे में और ग्रन्थ

झुकाव के समय इतिहास का अमीर खुसरो :-

अमीर खुसरो को कोइ विशेष चिंता नहीं थी इतिहास लिखने की इसलिए सच देखा जाये तो इनका मूल्यांकन पूर्ण रूप से इतिहास कर में नहीं किया जाता है किंतु वो अपनी लिखी हुई कविताओं में उन्होंने ऐतिहासिक विषयो में प्रयः लाया है इसी प्रकार से सन 1289 – 1325 के बीच में इनकी कभी रचनाएँ और कृतियाँ रची गयी थी
उनसे खास तौर पर कहा गया था इनमे से कुछ रचना के लिए तथा जोकि अन्य कुछ रचना ये अपने शाही रक्षको को खुश करने में लिखा था और ये कोई निष्पक्ष इतिहास कर नहीं थे l

किताबे अमीर खुसरो :-

मिफता-उल-फुतूह :-
उन्होंने 1291 ई में मिफता-उल-फुतूह की रचना किया इसी रचना में उन्होंने जलालुद्दीन खिलजी के सैन्य अभियानों, मालिक छज्जू का विद्रोह व उसका दमन,रणथम्बौर पर सुलतान की चढ़ाई,और अन्य स्थानों की विजय की प्रप्ति को हासिल किया थाl
तुगलकनामा:-
खुसरो की अंतिम ऐतिहासिक मसनवी कहलाती है इसमें तुग़लक़नामा खुशरोशाह के विरुद्ध में विजय का चित्रण गयासुद्दीन तुगलक है और इसमें जितनी भी कहानी है पूरी की पूरी धार्मिक रंग में प्रस्तुत किया जाता है इसमें तत्वों का प्रतीक गयासुद्दीन को मना गया है और उसे ही अमीर खुसरोशाह के साथ असत् तत्वों को संघर्ष करते हुए दिखया गया है l
अमीर खुसरो (Amir Khusro) की एक मजबूत पहलू ऐसा था की उसमे ये तिथियाँ बहुत सारा दिए है तथा इसलिए उनके ही द्वारा दिए गए कालक्रम बरनी की अपेक्षा कहीं अधिक विश्ववसनीय हो जाती है और इनकी जितनी भी रचना है सब काफी प्रकाश सामजिक स्थितियों पर डालती है यह ऐसा क्षेत्र मना गया है जिसकी और अन्य इतिहासकारों उस समय कोइ भी ध्यान नहीं गया था l
किरान-उस-सादेन :-
अमीर खुसरो की ऐतिहासिक विषय को लेकर उसकी पहली रचना “किरान-उस-सादेन” है – जिसको उन्होंने 1289 ई. में लिखी था .जिसमे अमीर खुसरो ने बुगरा खां और उनके पुत्र कैकुबाद के मिलन का वर्णन किया है. इसमें ये उसकी इमारतों,दिल्ली, अमीरों ,शाही दरबार, और अफसरों के सामजिक जीवन के बारे में उनके विषयो का दिलचस्प में विवरण कर देते हैं. तथा इसी रचना के द्वारा उन्होंने मंगोलों के प्रति अपनी घृणा भी प्रकट कर दिया था l
नूह सिपिहर :-
उन्हीने नूह सिपिहर में एक अन्य पुस्तक लिखा जिंसमे हिन्दुस्तान और उसके लोगों का अच्छा चित्रण दिखया गया है वह नूह सिपिहर (Nuh Sipihr) ही है.जिसमे मुबारक खिलजी का बड़ा ही चातुकारतापूर्ण विवरण किया गया है.इन्होने मुबारकशाह के भवनों के विजयों के साथ-साथ सब्जियों, भाषाओं,फलों,जलवायु, दर्शनरम जीवन जैसे विषयों पर विचार कर रखे थे जिसमे जीवंत चित्रण तत्कालीन सामजिक स्थिति को बड़ा ही देखने को मिलता है.l

Recent Posts

हमें आशा हे हमरी यह पोस्ट अमीर खुसरो की रचनाएँ पढ़के आपको अच्छा लगा हो और यह पोस्ट जरूर अपने दोस्तों में शेयर करे ताकि उनको भी अमीर खुसरो की रचनाएँ की जानकरी मिल सके l