मेट्रो रेल पर निबंध – Educational Dose

नमस्ते दोस्तों कैसे हैं आप, एक बार फिर से स्वागत आपका Educational Dose के इस नये पोस्ट ( मेट्रो रेल पर निबंध ) में, आज आप पढेंगे मेट्रो रेल के महत्व के बारे में एवं इनकी विशेषता के बारे में एवं उसकी उपयोगिता के बारे में इस पोस्ट ( मेट्रो रेल पर निबंध ) को आप ध्यान से पढिएगा तो चलिए शुरू करते है |

मेट्रो रेल

यह रेलवे का एक विकसित प्रकार है जिसे मुख्यता इंटरसिटी के बीच आवागमन के लिए प्रयोग किया जाता है। यह अत्यधिक लंबी दूरी के लिए चलने की बजाए कम दूरी की यातायात के लिए चलाई जाती हैं । यह यात्रा का सबसे अच्छा एवं सुगम साधन है, मेट्रो ट्रेन की रफ्तार और समय की सटीकता सभी ट्रेनों के मुकाबले बहुत ही अलग है।

मेट्रो रेल की शुरुआत कब हुई थी ?

मेट्रो रेलवे कोलकाता की आधारशिला सन 1972 में 29 दिसंबर को रखी गई। सन 1984 में 24 अक्टूबर को भारत की प्रथम मेट्रो के रूप में मेट्रो रेलवे कोलकाता का शुभारंभ हुआ।

दिल्ली मेट्रो का इतिहास एवं शुरुआत

यातायात को त्वरित एवं सुगम बनाने के लिए मेट्रो रेल सेवा एक बहुत ही बेहतरीन खोज है। मेट्रो रेल को भारत की राजधानी दिल्ली के परिवहन का एक बेहतरीन नमूना माना गया है ।मेट्रो रेल को दिल्ली मेट्रो रेल निगम लिमिटेड के द्वारा संचालित किया जाता है ,इसके द्वारा समय ,श्रम एवं धन का एक बड़ा रूप खर्च होता है।

दिल्ली मेट्रो की शुरुआत सर्वप्रथम 24 दिसंबर सन 2002 को हुई। मेट्रो रेल अधिक दूरी को अति सरल बनाने में बहुत सहायक है ,इस रेल में यात्रा के दौरान अधिक समय की यात्रा को तय करने में बहुत कम समय लगता है। इसकी शुरुआत 24 दिसंबर 2002 को दिल्ली के शाहदरा तीस हजारी रूट से हुई । इस ट्रेन की अधिकतम स्पीड विभिन्न रूटों के अनुसार 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक रखी गई है, क्योंकि इसे इंटरसिटी परिवहन के लिए प्रयोग किया जाता है।

मेट्रो रेल को रोकने के लिए स्पेशल मेट्रो स्टेशन का निर्माण किया गया है, जहां मेट्रो ट्रेन केवल 20 सेकंड के लिए रूकती है भारत के सभी मेट्रो रेल का निर्माण दक्षिण कोरिया की कंपनी रोटेम करता है ।

दिल्ली में मेट्रो ट्रेन के सफर उपयोग के बाद भारत देश के अन्य राज्य जैसे–उत्तर प्रदेश, राजस्थान ,हरियाणा व गुजरात में भी मेट्रो सेवा चालू करने का प्रयास किया जा रहा है। दिल्ली की मेट्रो रेल दुनिया का सबसे व्यस्ततम मेट्रो सेवाओं में से एक है ,तथा पूरी दुनिया में नौवें नंबर की सबसे बड़ी मेट्रो सेवा है। इसकी कुल लंबाई अलग–अलग डिवीजन के डिजाइन के हिसाब से 317 किलोमीटर होती है ,तथा इसके 229 स्टेशनों के माध्यम से इसे एयरपोर्ट बस स्टॉप ,तथा जरूरी जगहों से जोड़ा जाता है यह लंबी यात्रा के लिए बहुत ही सुगम एवं सस्ता साधन है।

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मेट्रो रेल हमारे लिए कैसे उपयोगी है ?

मेट्रो ट्रेन के डिब्बे वातानुकूलित होते हैं इसके माध्यम से यात्रियों को बिना कठिनाई के अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचने की सुविधा मिलती है ।मेट्रो सेवा चालू होने से लोगों को ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिली है ,तथा जरूरी जगहों जैसे –दफ्तर या नौकरियों पर समय पर पहुंचने के लिए यह एक उपहार के रूप में प्राप्त हुआ है ।

मेट्रो रेल सेवा से क्या तात्पर्य है ?

मेट्रो ट्रेन एक ऐसी ट्रेन है ,जिसे विशेष रूप से मेट्रोपॉलिटन शहरों में परिवहन सेवा देने के लिए डिजाइन किया गया है। इस ट्रेन का उपयोग दैनिक यात्रियों द्वारा शहर के भीतर छोटी दूरी को तय करने के लिए किया जाता है, इस प्रकार की ट्रेन भारत देश के केवल कुछ ही शहरों में मौजूद है |

मेट्रो और बुलेट ट्रेन में अंतर

मेट्रो ट्रेन के लोन के अदायगी जहां 10 साल बाद शुरू होती है, वही बुलेट ट्रेन का लोन 15 साल बाद शुरू होती है ,वही बुलेट ट्रेन का लोन 15 साल बाद चुकाया जाना शुरू होगा । इसी तरह मेट्रो को 10 साल बाद ब्याज और मूल रकम की अदायगी शुरू करके अगले 20 साल में लोन चुकाना होता है, परंतु बुलेट ट्रेन के मामले या अवधि लगभग 35 साल है।

दिल्ली मेट्रो में कितने स्टेशन है

दिल्ली मेट्रो का कुल ऑपरेशनल नेटवर्क करीब 375 किलोमीटर का है ,इसमें कॉरिडोर समेत 271 स्टेशन है।

दिल्ली मेट्रो पर पैराग्राफ

मेट्रो रेल अन्य रेल के मुताबिक अधिक सुविधाजनक और कम खर्च से अच्छी से अच्छी सेवा प्रदान करता है । आज के समय में लोग यातायात में अपना समय श्रम,धन व्यय नहीं करना चाहते ,इसलिए प्रत्येक व्यक्ति के लिए मेट्रो एक वरदान के रूप में साबित हो रहा है। भारत देश में अन्य ट्रेन की अपेक्षा मेट्रो ट्रेन की स्पीड बहुत बेहतर है । प्रतिदिन लंबी दूरी तय करके नौकरी पर जाने वाले लोग के लिए मेट्रो ट्रेन अधिक सुविधाजनक सिद्ध हुआ है ।

मेट्रो स्टेशन पर ट्रेन के अंदर पूरी तरह से साफ सफाई रहती है मेट्रो ट्रेन में हर कोई सफर करना पसंद करता है ,क्योंकि वहां पर लोगों को अन्य ट्रेनों के मुताबिक भारी भीड़ और धूल मिट्टी का सामना नहीं करना पड़ता है ,मेट्रो ट्रेन के अंदर पूर्ण रूप से सफाई एवं शांति पाई जाती है |
यह प्रत्येक स्टेशन पर अधिक से अधिक 20 सेकंड रूकती है वहीं दूसरी ओर देखा जाए तो बाकी ट्रेन को स्टेशन में पहुंचने मैं कई घंटों या कभी-कभी कई दिनों का समय लग जाता है। मेट्रो ट्रेन में यात्रा करने वाले लोगों को ट्रैफिक का सामना नहीं करना पड़ता है ।इस ट्रेन में कुछ सीटें महिलाओं के लिए भी आरक्षित की गई हैं। इस रेल की सबसे खास बात यह है कि ,इस ट्रेन के एक कंपार्टमेंट में सीसीटीवी कैमरे और गार्ड भी मौजूद रहते हैं ।

मेट्रो रेल की यात्रा का दृश्य

जिस दिन मेट्रो को हरी झंडी दिखाई गई थी उस दिन यात्रा करने के लिए मुफ्त सेवा शुरू की गई थी पहली बार मेट्रो में सफर करने के लिए कई सौ लोगों की भीड़ उमड़ गई थी । मेट्रो में स्वचालित दरवाजे होते है, जिनके द्वारा लोग अंदर आते जाते हैं और बैठने के लिए सीट तथा खड़े रहने के लिए स्टैंड भी बने होते हैं।

मेट्रो रेल के फायदे

आरामदेह यात्रा

मेट्रो रेल का सबसे बड़ा फायदा यह है, कि इसमें प्रत्येक यात्री को आरामदेह यात्रा का अवसर प्रदान होता है। आजकल उपनगरीय रेल गाड़ियों में बहुत भीड़ भाड़ है ,इसमें 1540 यात्रियों की डिजाइन की क्षमता की जगह लगभग 5000 लोग रोजाना सफर करते हैं। मेट्रो की वजह से इसमें 14 % कमी अपेक्षित है, पूरी रेल वातानुकूलित होने की वजह से यात्रियों को आवाज व धूल के प्रदूषण की तकलीफ नहीं होगी तथा इस प्रकार उनकी यात्रा आरामदेह व बेहतर होगी ।

आनजुड़े क्षेत्रों से मिलना

मुंबई के मुख्य वित्तीय क्षेत्रों जैसे– नरीमन प्वाइंट ,बांद्रा ,कुर्ला ,संकुल फोर्ट, वर्ली, लोअर ,परेल, गोरेगांव ,आदि को जोड़ते हुए जाती है।

बदलाव की सुविधा

मेट्रो रेल से चर्चगेट ,छत्रपति शिवाजी टर्मिनस मुंबई सेंट्रल, महालक्ष्मी ,आदि स्थानों पर मौजूदा उपनगरीय रेल में बदलाव सुविधाजनक होगा।
सड़कों की भीड़ भाड़ में कमी

मेट्रो रेल के कारण ट्रैफिक जाम तथा इंतजार का समय कम हो गया है, इसके शुरू होने के बाद इस क्षेत्रों में लोगों के समय श्रम एवं धन तीनों की बचत होती है।

सफर के समय में कमी

मौजूदा समय में यात्री को कफ परेड से एयरपोर्ट आने में करीबन 100 मिनट लगता है, परंतु मेट्रो रेल की सेवा आने से या समय घटकर 50 मिनट यानी आधा समय का हो गया है।

यात्रा के दौरान आराम व सुरक्षा

मेट्रो रेल सेवा प्रारंभ होने से यात्रा के दौरान पूर्णाराम व सुरक्षा का वरदान प्राप्त हुआ है ।सभी सुरक्षित प्लेटफार्म पर उपलब्ध एक्सीलेटर लिफ्ट सीसीटीवी ,गाड़ी के बंद दरवाजे, यह सुविधा बीमार व्यक्ति, वरिष्ठ नागरिक व महिलाओं के लिए आराम और सुविधा जनक सिद्ध हुआ है।

पर्यावरणीय लाभ

मेट्रो रेल की सुविधा के द्वारा पर्यावरणीय लाभ पूर्ण रूप से विकसित हुआ है ।इस रेल मैं यात्रा के दौरान लोगों को धूल मिट्टी एवं दूषित वायु का सामना नहीं करना पड़ता है ,इस रेल के चलने से वातावरण में प्रदूषण के स्तर में कमी पाई गई है।

वित्तीय लाभ

इस रेल के द्वारा अधिक व्यवसायिक निवेश के लिए विशिष्ट स्थान प्राप्त करेगा और अपने निर्माण काल तथा चालू होने के बाद भी रोजगार के निश्चित अवसर प्रदान करेगा।

मेट्रो ट्रेन के नुकसान

यदपि, देखा जाए तो मेट्रो ट्रेन से हमें कोई नुकसान नहीं है, बल्कि फायदा ही है परंतु फिर भी थोड़ा नुकसान हमें देखने को मिलता है, इस ट्रेन की लाइनें सदैव बड़ी होती है जिन्हें बनाने के लिए बड़े स्थान एवं समय की जरूरत होती है इसके निर्माण के दौरान कई हजार हरे भरे पेड़ पौधों को काट दिया जाता है ।जिन स्थानों पर बड़े-बड़े पेड़ पौधे काटे जाते हैं, वहां पर छोटे-मोटे पेड़ पौधे तो लगा दिए जाते हैं लेकिन पशु पक्षी उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं और इससे नए पेड़ पौधे नहीं हो पाती जिससे हमारे देश के पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

हम सभी को चाहिए कि हम इस आधुनिक युग में नए साधनों का उपयोग करें लेकिन उसके स्थान पर नए पेड़ पौधे भी लगाए ।इससे हमारा पर्यावरण सुरक्षित रहे इसके अलावा हमें मेट्रो रेल की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। वास्तव में ट्रेन हम सभी के लिए सुविधाजनक है इसका प्रयोग हमें जरूर करना चाहिए।

निष्कर्ष

इस लेख में आपने मेट्रो रेल के निबंध को हिंदी में पड़ा है , जिसमें मेट्रो के इतिहास उसके लाभ व हानि आदि को विस्तार रूप से प्रस्तुत किया गया है, यह निबंध अत्यंत सरल व सुगम भाषा में लिखा गया है, ताकि इससे प्रत्येक व्यक्तियों को पढ़ने व समझने में आसानी हो ।

मुझे आशा है दोस्तों की आप को आज का ये पोस्ट ( मेट्रो रेल पर निबंध ) पसंद आया होगा | यदि आपको मेरा यह पोस्ट( मेट्रो रेल पर निबंध ) अच्छा लगा है, और इससे आपको कुछ जानने को मिला है, और लगता है यह जानकारी अन्य लोगो को भी मिलनी चाहिये तो इसे आप Social Media पर जरूर Share कीजिये जिससे इसकी जानकारी और भी लोगो को मिले और वो भी जाने मेट्रो रेल के बारे में….


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