Chandrama ka Paryayvachi Shabd

Chandrama Ka Paryayvachi Shabd (चन्द्रमा का पर्यायवाची शब्द ) :-

नमस्कार दोस्तों आज की पोस्ट में हमने Chandrama Ka Paryayvachi Shabd को लायी हूँ l अगर सही और सरल भाषा में कह तो पर्यायवाची शब्द और जिस पर्यायवाची शब्द को बनया जाता है दोनों अर्थ समान होता है परन्तु ध्यान में रखते हुए वाक्यों को सही जगह पर प्रयोग करना चाहिए और साथ में ही समय की सावधानी का भी ध्यान रखनी जरुरी होता है ऐसा करना इसलिए जरुरी होता क्यूकि हर शब्द और हर पर्यायवाची की जगह के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं हो सकती है l

दोस्तों पर्यायवाची शब्द आप लोग ist क्लास से ही शुरू जाता है और अंतिम क्लासो तक पूछा जाता है और यह आपको जाना बहुत जरुरी होता है की पर्यायवाची शब्द क्या है क्यूकि यह आपके हर पेपरों में बराबर पूछा जाता होगा छोटे क्लास में तू छोटे छोटे पर्यायवाची आते हे जिसको हम असनी से बना लेते है परन्तु high school , inter में काफी कठिन शब्द का पर्यायवाची आ जाता है जिसका पर्यायवाची बनने में हम संकोच करने लगते है l साथ साथ ही कई कम्पटीसन की तैयरियों में भी पूछ लेता है इसलिए हमने या टॉपिक के बारे में हमने इस पोस्ट Chandrama Ka Paryayvachi Shabd में सब आसान तरीको में बता दिया है हमे आशा है इस पोस्ट को पूर्ण से पढ़ने से आपको पर्यायवाची शब्द की असनी जानकारी मिल जाये गई l

पर्यायवाची शब्द क्या है या किसे कहते :-

जब एक ही शब्द के कई अर्थ निकलते हो और वे दूसरे शब्दों का स्थान घेरते है ऐसे शब्द को पर्यायवाची शब्द कहते है ।
उदाहरण :- चंद्रमा की पर्यायवाची
चंद्रमा चाँद, हिमांशु, , सुधांशु, , तारापति, चन्द्र, शशि,मयंक ,इंदु , निशाकर, मृगांक, , हिमकर, राकापति ,राकेश, रजनीश, , ,कलाधर ,सोम, कलानिधि , सारंग, विधु , निशानाथ ,सुधाकर, हिमांशु।
दोस्तों चंद्रमा का पर्यायवाची शब्द सुनने और लिखने पढ़ने में समान है परन्तु इनके अर्थ अलग – अलग होते है

कुछ पर्यायवाची शब्द के उदाहरण:-

कबूतर – कपोत, पारावत, रक्तलोचन, हारीत, परेवा।

सरस्वती – भारती, वीणापाणि, महाश्वेता इला, वागीश, ब्राह्मी, गिरा, निधात्री, वागेश्वरी, शारदा।

समुद्र – पयोधि, जलधि, वारिधि, उदधि, सिन्धु, पयोनिधि, नीरनिधि, अब्धि, जलधाम, वारीश, अर्णव, रत्नाकर, पारावार।

जनार्दन – विश्वम्भर, नारायण, अच्युत, चक्रपाणि, मुकुन्द, गरुड़ध्वज, लक्ष्मीपति, जलशायी, चतुर्भुज।

तरंग – उर्मि, लहर, वीचि।

Chandrama ka Paryayvachi Shabd

नेट – जाल

देवता – देव, अमर, सुर, निर्जर, त्रिदश, अमर्त्य, अजर।

रात – तमिस्त्रा, निशा, रजनी, निशीथ, विभावरी, रैन।

विडोजा – कौशिक, देवराज, वज्रधर, शक्र, पुरंदर, मधवा, शचीपति, सुरपति।

मार – केतन, अनंग, मन्मथ, मनसिज, मनोभव, मयन।

तुरंग – बाजि, घोटक, घोड़ा, रविसुत, हय, सैंधव, अश्व।

बगीचा – आराम, वाटिका, उपवन, उद्यान, बाग, फुलवारी, निकुंज

शिव – महेश, महादेव, रुद्र, शम्भू, उमापति, शंकर, आशुतोष, मदनारि, चन्द्रमौलि, त्रिपुरारि।

जंगल – कान्तार, अरण्य, कानन, विपिन, वन, अटवी।

अर्जुन – पार्थ, धनञ्जय, भारत, गुडाकेश, गांडीवधारी।

अशव – घोड़ा, घोटक, हय, बाजि, तुरंग।

क्रोध – अमर्ष, रोष, कोप।

आँसू – अश्रु, नयननीर, नयनजल, नेत्रवारि।

कबूतर – कपोत, पारावत, रक्तलोचन, हारीत, परेवा।

आम – आम, रसाल, पिकवल्लभ, फलश्रेष्ठ, सहकार, अमृतफल,पिकप्रिय, पियम्बु, पिकबन्धु।

आँख – दृग, लोचन, चक्षु, नेत्र, दृष्टि, नयन, अक्षि।

आदित्य – सूर्य, रवि, भानु, प्रभाकर, दिवाकर, भास्कर

आकाशगंगा – मंदाकिनी, नभगंगा, सुरनदी, नभोनदी।

तरंग – उर्मि, लहर, वीचि।

पाँची – पूर्व।

बिजली – दामिनी, चंचला, तड़ित, चपला।

मृगेन्द्र – केसरी, नाहर, मृगराज, व्याघ्र, सिंह, हरि, वनराज, केसरी।

यमुना – कालिन्दी, अर्कजा, रवितनया, कालगंगा, कृष्णा,

समुद्र – पयोधि, जलधि, वारिधि, उदधि, सिन्धु, पयोनिधि, नीरनिधि, अब्धि, जलधाम, वारीश, अर्णव, रत्नाकर, पारावार।

वृक्ष – तरु, पादप, पेड़, अगम, विटप, द्रुम।

निशीथ – रात्रि, रजनी, निशा, विभावरी, रैन।

जनार्दन – विश्वम्भर, नारायण, अच्युत, चक्रपाणि, मुकुन्द, गरुड़ध्वज, लक्ष्मीपति, जलशायी, चतुर्भुज।

चाँदनी – चन्द्रातप, कौमुदी, ज्योत्स्ना, चन्द्रिका, चन्द्रकला, अमृततरंगिणी, चाँदनी।

अरविन्द – उत्पल, कोकनद, इन्दीवर, पद्म, नलिन, सरोज।

सूर्य – मार्तण्ड, सविता, भानु, भास्कर, आदित्य।

जीभ – जिह्वा, रसना, रसज्ञा, रसिका, चंचला।

लहर – तरंग, वीचि, हिलोर, उर्मि।

Chandrama ka Paryayvachi Shabd

सरिता – निम्ना, तटिनी, तरंगिणी।

सूर्य – दिनकर, दिवाकर, भानु, भास्कर, आदित्य, दिनेश।

अहि – उरग, सरीसृप, पवनाश, सर्प, नाग, भुजंग, पनग, नैसर्गिक – प्राकृतिक, स्वाभाविक, वास्तविक।

कमल – इन्दीवर, नलिन, सरोज, राजीव, सरसिज, शतदल।

हाथ – हस्त, पाणि, कर, बाहु।

आशय – सारांश, अर्थ, अभिप्राय, तात्पर्य, मतलब।

करण – मरीचि, दीप्ति, मयूख, रश्मि, कर, अंशु।

शशांक – चाँद, चंद्र, शशि, निशाकर, कलानाथ, सोम, विधु, द्विराज, राकापति, तारकेश्वर।

फल – परिणाम, नतीजा, अंजाम।

सुन्दर – चारु, ललित, रम्य, रमणीक, मनोहर, सुहावना, रुचिर।

मेह – निकेतन, भवन, सदन, आगार, आयतन, आवास, निलय, धाम, गृह।

कमल – जलज, सरोज, अब्ज, पंकज, तामरस, नलिन, सरसिज, अम्बुज, शतदल।

ऑग – जातवेद, हुताशन, कृशानु, वैश्वानर, दहन, वायुसखा, पावक, अनल।

पर्यायवाची शब्द क्या है या किसे कहते :-

जब एक ही शब्द के कई अर्थ निकलते हो और वे दूसरे शब्दों का स्थान घेरते है ऐसे शब्द को पर्यायवाची शब्द कहते है ।
उदाहरण :- चंद्रमा की पर्यायवाची
चंद्रमा चाँद, हिमांशु, , सुधांशु, , तारापति, चन्द्र, शशि,मयंक ,इंदु , निशाकर, मृगांक, , हिमकर, राकापति ,राकेश, रजनीश, , ,कलाधर ,सोम, कलानिधि , सारंग, विधु , निशानाथ ,सुधाकर, हिमांशु।
दोस्तों चंद्रमा का पर्यायवाची शब्द सुनने और लिखने पढ़ने में समान है परन्तु इनके अर्थ अलग – अलग होते है

चन्द्रमा किसे कहते है :-

पृथ्वी के चारो तरफ गति से घूमते हुए उपग्रह को चन्द्रमा कहते है जोकि 1 किमी /सेकण्ड में गति करता है और 27 .3 दिन पूरा है चन्द्रमा एक प्रकृति उपग्रह है जो हमेसा ग्रहो ही परिक्रमा करती है l

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निष्कर्ष :-

दोस्तों हमें आशा है आज की पोस्ट Chandrama ka Paryayvachi shbad को पढ़के आपको को पसंद आया होगा तो दोस्तों यह पोस्ट आप आपने दोस्तों में शेयर करे ताकि उनको भी ऐसी जानकारी मिल सके l और यदि आपके पास ऐसे कोइ टॉपिक हो तो हमें बातये ताकि हम आपके विचरो का अपनी पोस्ट में शेयर कर सकूँ l