Dussehra Essay In Hindi – Educational Dose

दशहरा पर निबंध

नमस्ते दोस्तों कैसे हैं आप,एक बार फिर से स्वागत आपका Educational Dose के इस नये पोस्ट ( Dussehra Essay In Hindi ) में , आज आप पढेंगे की दशहरा का पर्व क्यों मनाया जाता है ? और इस पर्व से हमे क्या सीख मिलती है ? इस पोस्ट ( Dussehra Essay In Hindi ) को आप ध्यान से पढिएगा तो चलिए शुरू करते है |

हमारे भारत देश में दशहरा या विजयादशमी का त्यौहार बड़े ही हर्ष-उल्लास के साथ मनाया जाता हैं | यह त्यौहार भारतीय संस्कृति के शौर्ये का उपासक एवं वीरता का पूजक हैं | यह त्यौहार आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता हैं |

सत्य की असत्य पर विजय

इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम चन्द्र जी ने महा पंडित एवं विद्वान राजा रावण का वध किया था | इसे सत्य की असत्य पर विजय के रूप में मनाया जाता है | इसलिए इस दशमी के दिन को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है | हमारा यह दशहरा पर्व वर्ष की तीन अत्यंत शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा | हमारे देश के लोग इस दिन नये कार्य की शुरुआत करते हैं | इस दिन बहुत से लोग वाहन पूजा एवं शस्त्र पूजा भी करते हैं |

प्राचीन काल में राजा भी इसी दिन विजय की प्रार्थना करके रण यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे | दशहरे का यह पर्व हमे दस प्रकार के पापो- काम, मद, लोभ, मोह, माया, अहंकार, आलस्य, चोरी, हिंसा, क्रोध, मत्सर आदि जैसे अवगुणों को छोड़ने की प्रेरणा देता है |
दशहरा पर्व का सम्बन्ध नवरात्रि से भी है क्योंकि नवरात्रि के नव दिन पूजन के बाद ही यह उत्सव होता हैं और इसमें महिसासुर के विरोध में देवी माँ आदिशक्ति के साहसपूर्ण कार्यो का भी उल्लेख मिलता है | नवरात्रि के नव दिनों के बाद दसवे दिन इसे मनाते हैं दशहरा का पर्व हर साल सितम्बर और अक्टूबर के अंत में दिवाली के बीस दिन के पहले आता है |

दशहरा का महत्व :-

हमारे देश के लोग इस दिन अपने अंदर की सारी बुराइयों को खत्म करके नई जीवन जीने की शुरुआत करते है | यह बुराई पर अच्छाई के जीत की ख़ुशी में मनाया जाने वाला त्यौहार हैं| दशहरा का यह त्यौहार जश्न के रूप में भी मनाया जाता है | सबके जश्न की अपनी-अपनी मान्यता है किसानो के लिए फसल को घर लाने का जश्न, बड़ो द्वारा बुराई पर अच्छाई का जश्न, बच्चो के लिए श्रीराम द्वारा लंकापति रावण के वध का जश्न आदि |यह पर्व बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है | लोगों का मानना है की इस दिन शुरू किये गये कार्य में जरुर सफलता मिलती है |

दशहरा पर्व पर मेले :-

हमारे भारत देश में कई जगहों पर दशहरा का मेला लगता है जैसे – कोटा में, कोलकत्ता में इत्यादि | जहा लोग अपने परिवार के साथ , अपने मित्र के साथ मेले में आकर भरपूर आनंद प्राप्त करते है |मेले में तरह-तरह की घर के सजावटी वस्तुये,खिलौने , कपड़े तथा खाने पीने के दुकान लगे होते है | इस दिन बच्चे मेला घूमने जाते है और मैदान में राम द्वारा रावण का वध देखने भी जाते हैं | इस दिन सडको पर बहुत ही ज्यादा भीड़ होती है गाँवों से लोग शहरों में मेला देखने आते है जिसे दशहरा मेला के नाम से भी जाना जाता हैं | रावण के वध देखने के बाद लोग देवी माँ के दर्शन करते हुए मेले का लुत्फ़ उठाते है | इतिहास की माने तो दशहरा के पर्व की शुरुआत महाराव दुर्जनशाल सिंह के कार्यकाल सन 1723 में हुआ था |

रामलीला और रावण का वध

दशहरा के कुछ दिन पहले रामलीला का आयोजन होता है जो दशरहा के पूर्ण होता है ,उस दिन रावण का विशाल पुतला बनाकर उस पुतले का दहन किया जाता है | दशहरा या विजयादशमी प्रभु श्री राम के विजय होने के रूप में मनाया जाता है|

क्यों न हम पहले अपने अन्दर के रावण को मारे

जब तक हम राम नही बनेंगे तब तक हम रावण को नही मार सकते इसलिए रावण पर विजय पाने के लिए पहले खुद राम बने
हम दशहरे में रावण का पुतला जलाते तो है परन्तु उससे हमे क्या सीख मिलती है ये हम नही जानते | वो सतयुग था जिसमे केवल एक रावण था जिस पर श्री राम चंद्र जी ने विजय प्राप्त की और यह कलयुग है यह तो घर घर में रावण हैं और इतने रावण पर विजय पाना मुश्किल है | इसलिए सबसे पहले हमे अपने अंदर के रावण को मारना चाहिये | जिस प्रकार अँधेरे को खत्म करने के लिए एक दीपक की रोशनी ही काफी है उसी तरह अपने अंदर के रावण को खत्म करने के लिए एक सोच ही काफी हैं |

निष्कर्ष

हमारे भारत देश कई प्रकार के त्यौहार मनाये जाते है और हर त्यौहार के पीछे कोई न कोई उद्देश्य जरूर होता है उसी तरह दशहरा माने के पीछे का उद्देश यह है की रावण एक महा पंडित और शिव भक्त था और उसके जैसा विद्वान उस समय और कोई नही था उसने महादेव की पूजा करके काफी सारे वरदान प्राप्त किये थे और उन वरदानो के मद में चूर होकर वह गलत कार्य करने लगा सभी देवी देवताओ और मनुष्यों पर अत्याचार करने लगा और कहते है न की जब पाप का घड़ा भर जाता हैI

तब उसे उसका दण्ड जरूर मिलता है तब श्री राम जी ने रावण का वध किया ठीक उसी तरह जब हम भी अपने घमंड में चूर होकर लोगो को परेशान करते है चोरी करते है क्रोध करते है तब हमे सजा मिलती है | तो दशहरा पर्व का उद्देश यही है की हम अपने अंदर की बुराइयों को खत्म करे और एक नये युग सतयुग की स्थापना करे |

मुझे आशा है दोस्तों की आप को आज का ये पोस्ट ( Dussehra Essay In Hindi ) पसंद आया होगा | यदि आपको मेरा यह पोस्ट( Dussehra Essay In Hindi ) अच्छा लगा है और इससे आपको कुछ जानने को मिला है और लगता है यह जानकारी अन्य लोगो को भी मिलनी चाहिये तो इसे आप Social Media पर जरूर Share कीजिये जिससे इसकी जानकारी और भी लोगो को मिले और वो भी जान सके दशहरा के महत्व के बारे में….


यदि आपके मन में कोई सवाल है मेरी इस पोस्ट( Dussehra Essay In Hindi ) से तो comment करके जरूर बताये मै उसका जवाब देने की पूरी कोशिश करूंगा …

You May Also Like These Posts