Essay on Durga Puja in Hindi

नमस्कार दोस्तों आज की पोस्ट में Essay on Durga Puja in Hindi लाये है दोस्तों इस पोस्ट के हमने ऐसे शिक्षक के लिए पोस्ट किया जिनके परीक्षा में अक्सर निबंध पूछा जाता है दोस्तों पहली कक्षा में जाते हो तब से लेकर इंटर तक निबंध परीक्षा में पूछता है, और ज्यादा ज्यादा से ज्यादा शब्दों में पूछता है इसलिए इस पोस्ट में ज्यादा से ज्यादा शब्दों लिखा गया हैI

Essay on Durga Puja in hindi

दुर्गा पूजा हिन्दू के प्रमुख त्योहारों में से एक है जोकि हर त्यौहार से ज्यादा दिनों तक रहता है हिन्दूधर्म के लोग ऐसे बड़ी उत्साह से मानते है और साथ ही साथ अनेक ध्रर्म के लोग इस त्यौहार को बहुत उत्साह से मानना पसंद करते यह त्यौहार कुछ लोग बहुत मनपसंद त्यौहार होता है क्युकी इस त्यौहार में लोगो बहुत घूमने को मिलता हैI
यह त्यौहार नवरात्रि में ही शुरू होता है और यह त्यौहार में मौसम बहुत अच्छा होता है क्युकी पतझड़ का मौसम लोगो वैसे ही पसंद रहता हैI

Essay on Durga Puja in Hindi – देखा जाए तो कैलेंडर के अनुसार सतमी से दशमी तक ही उत्साह का आयोजना होता है कुछ लोग दुर्गा पूजा के त्यौहार को नार्ट्री के नाम से जानते है और असम, बिहार , ओड़िशा , बांग्ला देश देशो में भी बड़े उत्साह से मानते है माँ दुर्गा शक्ति का प्रतीक है येही कारण है जब राम जी ने रावण वध किया था तो वध करने से पहले ही रामजी माँ दुर्गा की अर्चना और पूजा बड़े मन से कर लिए थे इस त्यौहार का उत्साह यह है की उपलक्ष में शाम के समय लोग भजन ,कीर्तन, डांडिया और नृत्य आदि की आलोचना करते हैl

दुर्गा पूजा मानाने का कारण :-

यह एक त्यौहार तो है परन्तु इसके मानाने जाने का कारण यह है की जब माँ दुर्गा को महिषासुर के अत्याचारों से दुखयित हो गयी थी तब वो महिषासुर को मरने की रचना की ,नवरत्रि के अंतिम दिन या कह सकते दशमी को माँ दुर्गा महिषासुर को नमक राक्षस वध किया था तथा उसी दिन राम जी ने रावण का वध किया और इसलिए यह दिन को विजय दशमी के रूप में मानते है
यह दिन को अच्छाई से बुराई की जीत के रूप में बड़ी उत्साह से मनाया जाता है यह त्यौहार कलकत्ता का महत्वपूर्ण त्यौहार है वंहा पे माता रानी हर घर में विराजमान की जाती है और सब बड़ी आराधना से पूजा करते है l

माँ दुर्गा का योजना :-

दुर्गा माँ का त्यौहार बड़े उत्साह और श्रद्धा से पुरे दस दिनों तक मानते है पहले दिन माँ दुर्गा को विराजमान करते है और नौ दिनों तक लोग माता रानी की पूजा विभिन्न रूप से करते है और शाम में माता रानी आरती और चालीसा ,अध्धय का अध्यन करते है और जहा माता रानी का पंडाल रहता है उसको अच्छे से सजते है पंडाल को रंग बिरंगे लाइटों और फूलो आदि से अच्छे से सजते है इस त्यौहार में रीझने के लिए हर घर प्रत्येक व्यक्ति नौ दिनों तक व्रत रहते है और जो नौ दिन नहीं रहते है वो लोग नौ रतन का पहला और अंतिम दिन व्रत रहते है नवरात के अंतिम के तीन दिन और दुर्गा पूजा त्यौहार दोनों अपने चरम पर आ जाता है और यह तीन दिन सतमी अष्टमी तथा नवमी को माता रानी की पूजा विशेष रूप से किया जाता है l यह त्यौहार सबसे ज्यादा कलकत्ता में बड़ी उत्साह से मनाया जाता है l

भूमिका:-

यह त्यौहार में भाईचारा और सौहार्द की भावना आपस में उत्पन्न करता है इस त्यौहार को हिन्दू लोग विशेष रूप मानते है दुर्गा पूजा त्यौहार हमें यह बताता है की हम किसी का बुरा न करे क्युकी इस त्यौहार का मुख्य उपदेश यह है की हमेशा बुराई पर अच्छई की जीत होती है इसलिए सभी हिन्दू लोग यह त्यौहार बहुत धूमधाम से मानते है और माँ दुर्गा में ही सब माता होती है इसलिए इन्हे शक्ति का प्रतीक कहा जाता है l

प्रस्तावना :-

कुछ लोग यह त्यौहार नवरात्री के नाम से जानते है स्त्री लोग यह त्यौहार को बड़े साफ सफाई उत्साहित करती है क्युकी यह त्यौहार स्त्री जाति की सम्मन्यता को दर्शता है माँ दुर्गा शक्ति का प्रतीक मणि जाति है इसलिए सभी उनके चरणों में आके प्रणाम करते है यह ऐसे दस दिनों तक किया जाता है जिसमे दुर्गा पूजा के नाम से विभिन्न प्रकार कार्यक्रम पुरे किये जाते है इस त्यौहार में हर घर और बाजरो में चारो तरफ लाल चुनरी , मातारानी की मूर्ति , और तरह तरह माला आदि देखने को मिलता है इस तरह हर तरफ एक अलग अलग रौनक देखने को मिलता है l

इतिहास :-

ऐसा मन जाता है की हिमाचल और मेनका की पुत्री माँ दुर्गा ही थी l और घर के पुरजन कहते थे की भगवान शिव की पत्नी “सती “जब दूसरा अवतार ली तो उनका दूसरा अवतार माँ दुर्गा का था क्युकी उस समय शक्तियों का दुरप्रयोग करने वाले महिषासुर अपने शक्ति का दुरुप्रयोग करते थे उस समय पृथ्वी लोक और देव लोक में बड़ी ही हाहाकार मची हुयी थी इसमें माँ दुर्गा और महिषासुर का योध्द चल रहा था और यह योध्द दस दिनों तक चलता की रहा था इसलिए लोग यह त्यौहार को नौ दिनों तक माँ दुर्गा के अलग अलग रूप में माँ की पूजा करते है और दसवे दिन माता रानी की प्रतिमा करके उनका विसर्जन करते है l

दुर्गा पूजा का विसर्जन :-


जिस दिन माता का विसर्जन होता है उसके एक दिन पहले लोग माँ दुर्गा के पंडाल में शाम के समय लोग बड़े ही दिल से आरती और भजन करते है और मातारानी के नाम से भंडारा करते है साथ साथ ही हवन भी करते है उस रात लोग बड़े ही मस्ती से इस त्यौहार को मानते है और सुबह होते ही माता रानी विदाई की तेरी करने लगते हैI

माँ दुर्गा की चचे से तैयार करके और झांकियो के साथ ढोल नगाड़े आदि के साथ को माता की विदाई करते है इनके विसर्जित करने के बहुत लोग जाते है और सबके आंखे नम होती है क्युकी मातारानी को लास्ट बार लोग देखते है उसके बाद एक साल बाद आती है इनके विसर्जन का दिन यह त्यौहार का अंतिम क्षण होता है येहि समय माँ अपने भक्तो को उनका आशीवार्द देती है सभी ख़ुशी और सुख समृद्धि की कामना करते हुये माता की विसर्जित करके अपने घर को जाते हैl

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उपसंहार :-

जिस तरह भारत में हर त्यौहार बड़ी धूमधाम से और उत्साह से मानते है उसी त्यौहार में एक त्यौहार Durga puja होता है जिस सब उत्साह पूर्वक मानते है यह त्यौहार परस्पर प्रेम और भाईचारे भावो का विस्तार करता है l माता रानी के इस त्यौहार को शक्ति के रूप और स्त्री के सम्मान में देखा गया है इस शक्ति की पूजा का लोगो ने साहस का संचार किया है और लोगो ने बतया है की बुराई के खिलाफ हमेशा लड़ते रहना और विजय को सदैव पाते रहना l


निष्कर्ष :-

दोस्तों हमें आशा है की हमरी यह Essay on Durga puja in hindi पसंद आयी होगी तो अपने दोस्तों में शेयर करे और आपके पास अगर ऐसे टॉपिक हो तू हमें batye ताकि हम अपनी बात अपने पोस्ट में शेयर करे l