Essay On Peacock In Hindi – Educational Dose

नमस्ते दोस्तों कैसे हैं आप, एक बार फिर से स्वागत आपका Educational Dose के इस नये पोस्ट (Essay On Peacock In Hindi ) में, आज आप पढेंगे हमारे राष्ट्रीय पंक्षी मोर के महत्व के बारे में एवं इनकी विशेषता के बारे में इस पोस्ट ( Essay On Peacock In Hindi ) को आप ध्यान से पढिएगा तो चलिए शुरू करते है |

Essay On Peacock In Hindi

हमारे भारत देश का राष्ट्रीय पंक्षी मोर है, जिसे उसके अदभुत सौन्दर्य के कारण हमारे भारत सरकार ने 26 जनवरी 1963 में राष्ट्रीय पंक्षी घोषित कर दिया| कई सुनहरे रंगों से सुसज्जित मोर पंक्षी विदेशो में भी पाए जाते हैं किन्तु सबसे ज्यादा सुंदरप्रजाति के मोर हमारे भारत देश में ही पाए जाते हैं| मोर पंक्षी सिर्फ हमारे देश का ही नहीं बल्कि श्री लंका का भी राष्ट्रीय पंक्षी है |

मोर की सुन्दरता बहुत आकर्षक एवं शान वाली होती है | बरसात के दिनों में जब काले बादल छा जाते है तब ये अपने पंख को फैलाकर नाचते हैं तो मनो ऐसा लगता है जैसे इन्होने हीरो जडित पोशाक पहन ली हो , और शायद इसीलिए इन्हें पंक्षियों का राजा भी कहा जाता है |
हमारे हिन्दू धर्म में कई ग्रंथो में इस पंक्षी को बहुत ही पवित्र माना गया हैं और भगवान श्री कृष्ण इसके पंख को अपने मुकुट पर सजाते थे | हमारे हिन्दू धर्म में मोर को मारकर खाना बहुत ही महापाप माना गया है जब मयूर नाचता हैं तो उसको देखकर हर मनुष्य का पैर थिरकने लगते हैं और ऐसा कहाँ भी जाता हैं की इसी पंक्षी को नाचते देखकर मनुष्य ने नृत्य करना आरम्भ किया था |

हमारा राष्ट्रीय पंक्षी मोर एक सर्वाहारी पंक्षी है यह अनाज में गेंहू, चना, बाजरा, मकई आदि खाता है इसके अलावा सब्जी एवं फल में अनार, अमरुद, टमाटर, प्याज, बैंगन आदि को बड़े ही मजे से खाता हैं यह किसानो के खेतो से कीड़े-मकोड़े, चूहे, छिपकली और सांपो को भी खाता है इसीलिए इसे सर्वाहरी पंक्षी कहते हैं यह किसानो का मित्र भी कहलाता हैं और भोजन की तलाश में यह कई बार मानव के क्षेत्र में भी आ जाता है |

मोर की आकृति

हंस की आकृति से मिलती जुलती मोर की आकृति भी होती हैं | मोर के आँख के नीचे सफेद रंग का घेरा होता हैं | मोर मोरनी से अत्यधिक मनमोहक होता हैं, मोर की गर्दन और सीना चमकीले नीले रंग के होते हैं और पंखो का रंग गहरे हरे रंग का होता हैं | मोरनी मोर से थोड़ी छोटी होती हैं और मोरनी के पास पंखो का गुच्छा नहीं होता है, यह हलके भूरे रंग की होती है | मोर की औसतन उम्र लगभग 25 से 35 वर्ष तक होती है मोर की औसतन लम्बाई 215 सेंटीमीटर के आस पास तक होती है, और वही मोरनी की लम्बाई लगभग 50 सेंटीमीटर तक होती है | मोर के पास बड़ी कलगी एवं मोरनी के पास छोटी कलगी होती है जिससे ये पहचान में आसानी से आ जाते हैं |

मोर की प्रजातीयाँ

मोर की दो प्रजातीयाँ होती है |

नीला व हरा
नीला मोर( पैवो क्रिस्टेटस )हमारे भारत देश एवं श्री लंका में पाया जाता हैं वही हरा मोर( पैवो म्युटिक्स )जावा औए म्यांमार में पाया जाता है | एक पंख मिलने पर सन 1913 से खोज शुरू हुई जो सन 1936 में खत्म हुई और कांगो मोर( अफ्रो पैवो कान्जेनेसिस ) की जाति का पता चला | कांगो मोर मुख्य रूप से अफ्रीका में ही पाया जाता है | यहाँ का मोर नीले व हरे रंग का होता हैं जिसकी पूँछ गोल व छोटी होती हैं और वही मोरनी का रंग हरा एवं लाल होता हैं और इसका ऊपरी भाग भूरा होता हैं यह ज्यादा ऊंचाई तक तो उड़ नहीं सकते परन्तु इनके सूघने की शक्ति बहुत ही तीव्र होती है, और इन्ही सब गुणों के कारण यह अपने प्रत्येक दुश्मन से आसानी से बच जाते हैं |

इतिहास एवं महत्व

हमारे हिन्दू धर्म ग्रन्थ में इनकी महत्वता को दर्शया गया हैं,जैसे प्रभु श्री कृष्ण ने अपने मुकुट में इनके पंख को धारण करके इनकी महत्वता को दर्शाया हैं महाकवि कालिदास जी ने अपने महाकाव्य मेघदूत में मोर पंक्षी को राष्ट्रीय पंक्षी के औदे से भी ऊँचा दर्जा दिया हैं | हमारे भारत देश में मोर पंक्षी कई सारे राजा महाराजाओ का पसंदीदा पंक्षी रह चूका हैं | प्रसिद्ध सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के राज्य में जो सिक्के चलते थे उनमे दूसरी तरफ मोर की आकृति बनी हुई थी , और मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने अपने तख़्त-ए-ताऊस में दो नाचते हुए मोरो की आकृति को बनवाया था, और यह सिंहासन मयूर सिंहासन के नाम से भी जाना जाता था | जिसे बाद में नादिरशाह लूट कर अपने मुल्क ईरान ले गया |

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प्रजनन

प्रजनन के समय में मोर दो से चार मोरनियो के साथ सम्बन्ध बनाता हैं जिनमे से प्रत्येक मोरनिया जमीन में बने गड्ढो में पांच से आठ अंडे देती हैं | मोरनियाँ एक वर्ष में दो बार अंडे देती हैं जिनकी संख्या पांच से आठ तक रहती हैं, अन्डो में से बच्चे लगभग 20 से 30 दिनों में बाहर निकल आते हैं और बच्चे 3 से 4 वर्ष में बड़े हो जाते हैं, किन्तु मोर के बच्चे बहुत ही कम संख्या में बच पाते हैं क्योंकि इनमे से अधिकांश को सियार और कुत्ते खा जाते है |

मोर संरक्षण क़ानून

हमारे भारत देश में मोर का शिकार होने से इनकी संख्या दिन ब दिन कम होती जा रही थी , जिसे हमारी भारतीय सरकार ने नजर में रखते हुए 1972 में मोर की सुरक्षा के लिए मोर संरक्षण कानून बनाया जिससे हो रहे शिकार पर रोक लग सके | और कई ऐसे नियम मोर की सुरक्षा के लिए बनाये जिससे मोर की संख्या में काफी सुधार आया हैं |

मुझे आशा है दोस्तों की आप को आज का ये पोस्ट ( Essay On Peacock In Hindi ) पसंद आया होगा | यदि आपको मेरा यह पोस्ट( Essay On Peacock In Hindi ) अच्छा लगा है, और इससे आपको कुछ जानने को मिला है, और लगता है यह जानकारी अन्य लोगो को भी मिलनी चाहिये तो इसे आप Social Media पर जरूर Share कीजिये जिससे इसकी जानकारी और भी लोगो को मिले और वो भी जाने Peacock के बारे में….


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