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IRDA IC 38 exam |महत्त्वपूर्ण शब्द और उनका विवरण

IRDA IC 38 exam

IRDA IC 38 exam महत्त्वपूर्ण शब्द और उनका विवरण

दोस्तों आज के इस पोस्ट IRDA IC 38 exam में मैंने IRDA परीक्षा के लिए ऐसे कुछ महत्त्वपूर्ण शब्दों का संग्रह लाया हूँ, जो बहुत कठिन होने की वजह से ठीक से समझ में नहीं आता, और जिसकी वजह से परीक्षा में बहुत से लोग ठीक से स्कोर नहीं कर पाते और फेल हो जाते हैं।

बीमाकर्ता 👉 जिसके नाम पर बीमा किया जाता है वो बीमाकर्ता होता है।
प्रस्तावक 👉 जो किसी के बीमा करने के लिए प्रस्ताव करता है जैसे की अगर एक पिता अपने बच्चे का बिमा करवाता है तो प्रस्तावक कहलायेगा।
प्रतिफल 👉 बीमा के लिए जो रकम हर वर्ष जमा की जाती है उसे प्रतिफल या प्रीमियम कहते हैं।
बिमा योग्य हित 👉 जब कोई व्यक्ति किसी के लिए बीमा का प्रस्ताव करता है तो उस समय बीमा योग्य हित देखा जाता है अर्थात उसे उस व्यक्ति के न रहने पर क्या नुकसान हो सकता है अगर ये वित्तीय नुकसान होता है तो ही ये बीमा योग्य हित मन जाता है।
जैसे :- एक पिता का अपने पुत्र या पुत्री के लिए, एक बिज़नेस पार्टनर का दूसरे बिज़नेस पार्टनर के लिए, एक फाइनेंस कंपनी का अपने ग्राहक के लिए जिसको उसने ऋण दिया है, एक कम्पनी के मालिक का अपने कर्मचारियों के लिए इत्यादि।

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अगर बीमा योग्य हित साबित होता है तो ही उसे बीमा दिया जाता है।
नॉमिनी 👉 हिंदी में इसे उत्तराधिकारी भी कह सकते है, इसका सीधा सा अर्थ ये है कि एक बीमित व्यक्ति के न रहने पर बीमा कम्पनी उसका लाभ किसको दे, ये बीमा लेते वक्त ही पॉलिसी धारक फॉर्म पर नॉमिनी का नामांकन कर देता है।
परम सद्भाव 👉 जब इंश्योरेंस कंपनी और ग्राहक अपने बारे में सब कुछ सुच बताते हैं तो इसे परम सद्भाव कहते है, कंपनी का एजेंट प्लान के बारे में और उसके टर्म एंड कंडीशन का विस्तृत जानकारी दे साथ ही ग्राहक को भी अपने बारे में सब सच बताना जरूरी है जैसे की उसकी आदतें, व्यवसाय, पारिवारिक इतिहास, निजी इतिहास, आयु इत्यादि।
राइडर 👉 जब किसी जीवन बीमा पालिसी में ग्राहक से थोड़ी सी क़िस्त और लेकर उसको कुछ अतिरिक्त लाभ दिया जाई जैसे की – दुर्घटना बीमा, कैंसर इलाज, दिल का इलाज इत्यादि। तो इस केस में अगर ग्राहक ने कोई राइडर पालिसी लेते वक्त ले रखा है तो उस समस्या के दौरान बीमा कंपनी ग्राहक का इलाज कराती है, राइडर सिर्फ पालिसी लेते वक्त ही लिया जा सकता है बाद में नहीं।

नियुक्त व्यक्ति (अपॉइण्टी ) 👉 जब ग्राहक अपने बच्चे के नाम पर बीमा करवाता है जिसकी उम्र 18 वर्ष नहीं हुई है तो ऐसे केस में ग्राहक को एक नियुक्त व्यक्ति रखना होता है।

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