IRDA IC-38 Question and Answers in Hindi Part – 1

दोस्तों मैंने इस पोस्ट IRDA IC-38 Question and Answers in Hindi में बहुत ही महत्त्वपूर्ण प्रश्नो का संग्रह लाया हूँ, जो आपके इंश्योरेंस एजेंट बनने में अर्थात IRDA परीक्षा को पास करने में बहुत मदतगार शाबित होगा ।
मैं ऐसे ही कुल 10 पार्ट्स आपके लिए लेके आ रहा हूँ अगर आपने सारे पोस्ट को ठीक से पढ़ लिए तो फिर आपको कुछ और पढ़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

1- बीमा कारोबार की शुरुआत लंदन के लॉयड्स कॉफ़ी हाउस से हुई।
2 – भारत की पहली जीवन बीमा कमपनी ओरियंटल लाइफ इंश्योरेंस थी।
3 – नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड 1906 में स्थापित सबसे पुरानी बीमा कंपनी थी ।
4 – जिस तरह से सभी bank RBI के अधीन है, उसी प्रकार सारे इंश्योरेंस कम्पनीज IRDA के अधीन हैं ।
5 – IRDA ( बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण ) की शुरआत अप्रैल 2000 से हुई।
6 – एक बीमा पॉलिसी दो पार्टियों के बीच एक अनुबंध है । ( बीमा कंपनी और पालिसी धारक के बीच )
7- फ्री लुक अवधी 15 दिन का होता है जिसमे पॉलिसी धारक संविदा को समाप्त कर सकता है।
8- जीवन बीमा एक अमूर्त उत्पाद है।
9 – बीमा जोखिम हस्तांतरण की एक विधि है।
10 – बीमा एक ऐसी व्यवश्था है जिसमे कुछ लोगों की हानि को कई लोगों में बांटा जाता है।
11 – एक सामान जोखिम वाले सामूहिक धन को पूलिंग कहते है।
12 – एमी केबल सोसाइटी फॉर परपिचुअल इंश्योरेंस, जिसकी शुरआत वर्ष 1706 में लंदन में हुई थी, विश्व की सर्वप्रथम बीमा कंपनी थी।

Also Read:- IRDA IC 38 Exam |महत्त्वपूर्ण शब्द और उनका विवरण

13 – बीमा कंपनियों के सञ्चालन एवं नियंत्रण के लिए बीमा अधिनियम 1938 सर्वप्रथम बनायीं गई।
14 – जीवन बीमा कारोबार का राष्ट्रीय करण 1 सितम्बर 1956 को किया गया एवं LIC की स्थापना की गई।
15 – गैर जीवन बीमा का रास्ट्रीयकरण 1972 में किया गया।
16 – वर्ष 1993 में बीमा के विकास के लिए RN मल्होत्रा की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई।
17 – जोखिम को अंतरित या ट्रांसफर कर देने की प्रक्रिया ही बीमा है।
18 – बीमा कुछ लोगों की हानि को बहुत लोगों में बाँटने की विधि है।

19 – बीमा एक कानूनी अनुबंध है, जो भारतीय अनुबंध अधिनियम 1872 में उल्लेखित आवश्यकताओं को पूरा करती है।
20 – बीमा के दौरान किसी भी प्रकार की समस्या के लिए ग्राहक को सबसे पहले कंपनी की शाखा में शिकायत करनी चाहिए।
21 – अगर बीमा कंपनी 30 दिनों के अंदर समस्या का समाधान नहीं कर पाती, तो ग्राहक एक वर्ष के अंदर बीमा लोकपाल को शिकायत कर सकता है इसके लिए किसी भी प्रकार की कोई फीस नहीं लगती।
22 – बीमा लोकपाल 20 लाख रूपये तक का फैसला कर सकती है।
23 – संविदा या कॉन्ट्रैक्ट करने वाले की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
24 – बच्चो के लिए भी बीमा कर सकते हैं पर वो संविदा नहीं कर सकते उनके लिए संविदा उनके माता पिता करते हैं।
25 – बीमा अधिनियम 1938 की धारा 45 के अनुसार एक बीमा कंपनी पॉलिसी के 3 वर्ष पूरे होने के बाद उस पॉलिसी पर कोई सवाल नहीं उठा सकती।
26 – बीमा योग्य हित पॉलिसी लेते समय विद्द्मान होना जरूरी है।
27 – एंटी मनी लांड्री 2002 के तहत अधिकतम 50,000 रूपये तक का प्रीमियम या प्रतिफल नकद रूप में जमा की जा सकती है।
29 – पॉलिसी दस्तावेज़ के तीन भाग होते है – पॉलिसी अनुसूची, मानक प्रावधान एवं विशिष्ट प्रावधान।
30 – FPR ( फर्स्ट प्रीमियम रिसिप्ट ) संविदा शुरू होने का साक्ष्य है।
31 – पॉलिसी दस्तावेज़ बीमा कंपनी तथा बीमा धारक के बीच अनुबंध का साक्ष्य है।
32 – पॉलिसी धारक अपने पॉलिसी में एक या अनेक नॉमिनी बना सकता है।
33 – बीमा अधिनियम 1938 की धारा 38 के तहत पॉलिसी का समानुदेशन किया जा सकता है अर्थात पॉलिसी दुसरे व्यक्ति हस्तांतरण किया जा सकता है।
34 – जीवन बीमा उद्पाद 2 प्रकार के होते हैं – परम्परागत एवं गैर परम्परागत
35 – पॉलिसी में बीमा अधिनियम 1938 की धारा 39 के तहत नॉमिनी बनाने का प्रावधान है।

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