kriya ki paribhasha :- education dose

हेलो दोस्तों आज की kriya ki paribhasha में आपका दिल से स्वगत है दोस्तों आप इस kriya ki paribhasha को तीसरी कक्षा से लेकर इंटर तक पड़ते है l और यह आप के परीक्षा में भी पूछा जाता है कभी कभी आप कोई कम्पटीसन की तैयारी करते हो तो उसमे भी इससे मिले जुलते प्रश्न पूछ लेता है जैसे kriya ki paribhasha किसी कहते या कितने प्रकार है , क्रिया के उदहारण ही पूछ लेता है l

kriya ki paribhasha :-

जब किसी काम का करना या होना पाया जाता है तो उसे क्रिया कहते है l या कह सकते है किसी शब्द में हमको उसके काम करने या होने का बोध होता है तो उसे क्रिया कहते है l
जैसे :- पढ़ना, सोना, पीना,खाना khaya , खेलना ,लिखना, आदि।
उदाहरणस्वरूप अगर एक वाक्य ‘इसका नाम मोहन है’ तो इसमें ‘है’ शब्द क्रिया है।
‘मैंने खाना खाया’ तो देखा जाये तो इसमें ‘खाया’ शब्द क्रिया है।


क्रिया के निम्न उदहारण :-

राम पुस्तक पढता है।
रीता गाना गाता है।
हम धीरे-धीरे चलते है।
रमा नाचती है।
माँ फल खाती है।
सूरज गाडी चलाता है।
मैं साइकिल चलाता हूँ।
रमा रोटी बनाती है।
माँ खाना बनती है l


क्रिया के भेद :-

रचना की दृषिट के अनुसार पांच भेदों में बाटा गया है l तथा क्रिया को कर्म के अनुसार दो भेदों में बाटा गया है l

रचना की दृषिट के अनुसार :-

  1. संयुक्त क्रिया
  2. नामधातु क्रिया
  3. सामान्य क्रिया
  4. पूर्वकालिक क्रिया
  5. प्रेरणार्थक क्रिया

संयुक्त क्रिया:-

जब क्रिया मै दो या दो से अधिक धातु मिलते है और उन्ही धातुओं से मिलकर क्रिया बनती है तो ऐसे क्रिया को संयुक्त क्रिया कहते हैं।
जैसे – पढ़ा सकते है ,लिखना चाहता हूँ ,घूमना चाहती हूँ , घुमा सकते हो आदि संयुक्त क्रिया है ।

नामधातु क्रिया :-

जब क्रिया संज्ञा,विशेषण तथा सर्वनाम शब्द आते है और इन्ही से क्रिया के बनती है तो क्रिया के ऐसे पदों को ही नामधातु क्रिया कहते हैं |
जैसे– बतियाना, ,हथियाना,लतियान ,दफ़्नीनिया आदि नामधातु क्रिया है ।

सामान्य क्रिया :-

जिस क्रिया के अंत में केवल ही एक क्रिया का प्रयोग किया जाता है , उसे सामान्य क्रिया कहते है |
जैसे – तुमने पढ़ा, दीपक आया, मै बनयी आदि ऐसे शब्द सामान्य क्रिया है l

पूर्वकालिक क्रिया :-

जब किसी शब्द के क्रिया मै क्रिया तुरंत समाप्त हो जाता है तो ऐसे क्रिया को पूर्वकालिक क्रिया कहते है
जैसे– मोहन नहा के नानी के घर जायेगा , रमा रोटी खाकर स्कूल जाएगी, हम आज ही बाजार जाएंगे आदि ऐसे वाक्यों को पूर्वकालिक क्रिया कहते है ।

प्रेरणार्थक क्रिया :-

जब क्रिया के किसी कर्ता को स्वंय कार्य न करके किसी दूसरे कार्य की प्रेरणा देती हो तो ऐसे क्रिया को प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैl
जैसे – पापा मुझसे ही मंगवाते है , राधा राम से पत्र पढ़वाती है , आशु को ही रुलाती है l आदि ऐसी क्रिया प्रेरणार्थक क्रिया है l

कर्म के अनुसार :-

1.अकर्मक क्रिया
2.सकर्मक क्रिया

अकर्मक क्रिया:-

जब किसी वाक्य मै क्रिया के होने का व्यापार का फल उसके कर्ता पर ही पड़े तो ऐसे क्रिया को अकर्मक क्रिया कहते है l
जैसे –
a) अनीता सोती हैं l
b) शालू रोती है।
ऐसे वाक्य में कर्म नहीं होता है जोकि इस प्रकार है ; जाना ,खुलना , सोना , हँसना , चलना , रुलना , उठना आदि ऐसे वाक्य अकर्मक क्रिया है l ऊपर दिए उदाहरण में रोती तथा सोती का फल क्रिया के कर्ता पर पड़ता है l
अकर्मक क्रिया के निनलिखित उदाहरण :-
रमू चिल्लाता है।
गोजर रेंगता है।
नीतू हंसती है।
राज दौड़ता है।
मोहन लजाता है।
इसको बचता है l
ऊपर दिए उदारण में दौड़ता हैं, हंसती है, रेंगता है,, बचाता है,चिल्लाता है आदि ऐसे वाक्यों में कर्म का अभाव होता है तरह क्रिया का फल कर्ता पर ही पड़ रहा होता है।, अतः ऐसे उदाहरण अकर्मक क्रिया के अंतर्गत आते है।

2.सकर्मक क्रिया:-

जब किसी वाक्य मै क्रिया के फल व्यापार के कर्म ही पड़े तो ऐसे क्रिया को सकर्मक क्रिया कहते है
जैसे : रवि पानी पीता है।इस उदहारण में पीता है शब्द (क्रिया) का फल कर्ता पर नहीं पड़ता बल्कि कर्म पानी पर पड़ रहा होता है अतः ऐसे शब्द की सकर्मक क्रिया होते है।
सकर्मक क्रिया के निन्मलिखित उदाहरण :

रेनू सेब कहती है l
लड़की गाडी चलाती है।
शयाम बाइक चलाता है ।
रमा दाल बनाती है।
आप देख सकते है ऊपर दिए गये उदाहरणों में क्रिया का फल कर्ता पर नही पड़ के उसके कर्म पे पड़ रहा होता है l अतः यह ऐसे उदाहरण सकर्मक क्रिया के अंतर्गत आते है l
अकर्मक क्रिया और सकर्मक क्रिया में अंतर :-
सकर्मक क्रिया
इस क्रिया के कर्ता द्वारा किए गए कार्य से किसी दूसरी चीज में जरूर कुछ न कुछ प्रभाव पड़ता है l
जैसे– राम खाता है।

रचना की दृषिट के अनुसार :-

रेनू सेब कहती है l
लड़की गाडी चलाती है।
शयाम बाइक चलाता है ।
रमा दाल बनाती है।
आप देख सकते है ऊपर दिए गये उदाहरणों में क्रिया का फल कर्ता पर नही पड़ के उसके कर्म पे पड़ रहा होता है l अतः यह ऐसे उदाहरण सकर्मक क्रिया के अंतर्गत आते है l

अकर्मक क्रिया और सकर्मक क्रिया में अंतर :-

सकर्मक क्रिया
इस क्रिया के कर्ता द्वारा किए गए कार्य से किसी दूसरी चीज में जरूर कुछ न कुछ प्रभाव पड़ता है l
जैसे– राम खाता है।

अकर्मक क्रिया
इस क्रिया के कर्ता द्वारा किए गए कार्य से चीज या किसी और पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है l
जैसे– राम खाना खाता है।

You may also like these post :-

निष्कर्ष :-

दोस्तों हमे आशा हे इस पोस्ट kriya ki paribhasha आपको अच्छा लगा होगा तो कृपा करे इस पोस्ट अपने दोस्तों में शेयर करे ताकि उनको भी ऐसी जानकारी मिले और ऐसे शब्द आपके पास हो तो हमें बातये ताकि उस शब्द को हम अपने पोस्ट में रख सके l