Practice Makes a Man Perfect Essay

नमस्ते दोस्तों कैसे हैं आप, एक बार फिर से स्वागत आपका Educational Dose के इस नये पोस्ट Practice Makes a Man Perfect में, आज आप पढेंगे की व्यक्ति किस तरह से निरंतर अभ्यास करके अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करता है ? और अभ्यास का हमारे जीवन में क्या महत्व है ? इस पोस्ट को आप ध्यान से पढिएगा तो चलिए शुरू करते है |

प्रस्तावना

अभ्यास के द्वारा ही इंसान हर नामुमकिन चीज़ को मुमकिन बना सकता है हम अपने दैनिक जीवन में जो भी कार्य करते है वो सब अभ्यास के द्वारा ही करते हैं क्योंकि कोई भी इंसान किसी भी कार्य को बिना अभ्यास के अच्छे तरीके से कर ही नहीं सकता है|
चाहे वह खेल जगत हो,शिक्षा हो या फिर अपने दैनिक कार्य अभ्यास करने से ही हम निपूर्ण बनते हैं |

नियमित अभ्यास हमारी गलतियों एवं विकारो को सही करके हमे सफलता की ओर अग्रसर करता है, हमे हर क्षेत्र में सफलता हासिल करने में अभ्यास की एक अहम् भूमिका होती हैं |

कोई व्यक्ति जो सफलता प्राप्त करना चाहता है। उसे अपने कार्य को पूर्ण करने के लिए योजना के अनुसार आवश्यक घंटों के लिए रोजाना अभ्यास करना होता है। उसे अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए पूरी ईमानदारी के साथ प्रतिदिन कठिन परिश्रम में विश्वास करना होगा। प्रतिदिन अभ्यास के साथ कार्य के लिए लग्न हमें लक्ष्य की प्राप्ति कराता है।

विद्यार्थी के लिए अभ्यास

वो सभी विद्यार्थी जो बोर्ड की परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करते हैं। वे पूरे वर्ष योजनाबद्ध अभ्यास से और अपने दिमाग के माध्यम से पढ़ाई करते हैं। वे अपने पाठ्यक्रम को दोहराते हैं और फिर दोहराते हैं और खुद को अपने सभी विषयो के लिए बहुत अच्छा बना लेते हैं। नियमित अभ्यास के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं है, जो किसी को भी पूर्ण बना सके। बिना अभ्यास के विद्यार्थी केवल अपना औसत प्रस्तुत कर सकते हैं, परन्तु किसी भी कार्य का पूर्ण प्रदर्शन नहीं कर सकते हैं।

अभ्यास एक ऐसा गुण है जो उपलब्धियों एवं सफलताओं का रास्ता दिखाता है। पुराने समय के ऋषि मुनियों ने कठिन परिश्रम करके ही अनेक सिद्धियाँ प्राप्त की क्योंकि उन्होंने निरंतर अभ्यास किया, बहुत से राजाओं ने और बहुत से राक्षसों ने अपने कठिन परिश्रम के बल पर ईश्वर से अनेक प्रकार के वरदान भी प्राप्त किये थे।

Practice Makes a Man Perfect

अभ्यास का महत्व

अपना लक्ष्य पाने के लिए अभ्यास सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि व्यक्ति जितना अधिक अभ्यास करता है, वह उतना ही अधिक गुणी और आत्मविश्वासी बनता है। अभ्यास के द्वारा ही हम पहले की गई गलती को दुबारा दोहराते एवं नई चीजों को सीखते हैं। कोई भी व्यक्ति किसी भी आयु में अभ्यास कर सकता है और किसी भी आयु में विकसित कर सकता है, हालांकि: इसे अन्य गतिविधियों, जैसे- , पढ़ना, खाना, खेलना, खाना बनाना,घूमना, बात करना, लिखना आदि का बचपन से ही अभ्यास करके विकसित करना कुछ ज्यादा ही अच्छा होता है।

एक स्कूल जाने वाला बच्चा लेख लिखने का अभ्यास करने से पहले शब्द,वाक्य और अन्त में पैराग्राफ लिखने का कार्य करता है औरजब वह निपूर्ण हो जाता हैं तब वह बच्चा बड़े लेख लिखने का अभ्यास करता है: जो उन्हें पूर्णता की ओर ले जाता है, फिर चाहे वह पढ़ना हो, लिखना हो या बोलना हो, इस तरह प्रतिदिन अभ्यास करने से वह अपने अंदर एक योग्य और कुशल प्रतिभा को विकसित कर लेता है।

सफलता की कुंजी

जो व्यक्ति अपने अंदर के आलस्य को समाप्त कर देता है और कठिन परिश्रम करता है तो उसके उन्नति के मार्ग में कोई भी बाधा नहीं आ सकती है। जो व्यक्ति परिश्रम से दूर भागता है उसे कभी भी सफलता प्राप्त नहीं हो सकती है, अगर किसी भी व्यक्ति को किसी भी क्षेत्र में सफलता चाहिए तो उसे प्रतिदिन अभ्यास करने की जरूरत पडती है। निरंतर अभ्यास को ही सफलता की (कुंजी ) कहते है जी हाँ अगर कोई व्यक्ति या विद्यार्थी जितना ही अभ्यास करेगा तो उसे उसका लक्ष्य अवश्य शीघ्र मिलेगा ,और वो व्यक्ति अपने लक्ष्य तक पहुँच कर सफलता प्राप्त करता हैं । किसी भी कार्य में सफलता पाने के लिए अभ्यास और परिश्रम दोनों ही करना बहुत जरूरी होता है |

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ऐतहासिक धारणाएं और कहानियाँ

यदि आपने इतिहास का अध्ययन किया है या कुछ ऐसी ऐतिहासिक कहानियों को सुना है तो आपने यह कहानी अवश्य सुनी होगी की गुरु द्रोणाचार्य ने एकलव्य को धनुर्विद्या की शिक्षा देने से इनकार कर दिया था तब एकलव्य ने द्रोणाचार्य को अपना गुरु मान कर उनकी प्रतिमा की स्थापना की और प्रतिदिन अभ्यास से धनुर्विद्या में कुशल एवं पारंगत हो गया और एक महान योद्धा बना | इस तरह से अगर व्यक्ति निरंतर अभ्यास करे तो वह कर्म सफल अवस्य होगा |

वाल्मीकि जी जोकि एक डाकू रत्नाकर के नाम से प्रसिद्ध थे उन्होंने प्रतिदिन गहन तपस्या करने के पश्चात् आदि गुरु कहलाये और उन्हें रामायण लिख डाली और रामायण के रचियता गोस्वामी तुलसीदास के नाम से प्रसिद्ध हुए | रत्नाक डाकू एक अत्यंत अभद्र जीवन व्यतीत करते थे और साधुओं के एक साधरण से विचार ने उनका मन बदल दिया और उनके कठिन तप एवं निरंतर अभ्यास ने उन्हें इतना अधिक महान बना दिया |

निष्कर्ष

हम अपने जीवन में प्रतिदिन अभ्यास करेंगे तो हम अपने जीवन को एक नई दिशा एवं एक लक्ष्य प्रदान कर सकते है और अपने परिवार और दूसरो के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन सकते है। अब्राहिम लिंकन भी कई बार चुनाव हारने के बाद भी अमेरिका के राष्ट्रपति बने। ऐसे ही अगर कोई व्यक्ति प्रयत्न करता है तो उसका प्रयत्न कभी भी व्यर्थ नहीं जाता ,एवं निरंतर अभ्यास करने से सफलता अवश्य प्राप्त होती है।

मुझे आशा है दोस्तों की आप को आज का ये पोस्ट Practice Makes a Man Perfect पसंद आया होगा | यदि आपको मेरा यह पोस्ट अच्छा लगा है, और इससे आपको कुछ जानने को मिला है, और लगता है यह जानकारी अन्य लोगो को भी मिलनी चाहिये तो इसे आप Social Media पर जरूर Share कीजिये जिससे इसकी जानकारी और भी लोगो को मिले और वो भी जाने अभ्यास के महत्व के बारे में….


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