Pradushan Par Nibandh – Educational Dose

नमस्ते दोस्तों कैसे हैं आप, एक बार फिर से स्वागत आपका Educational Dose के इस नये पोस्ट ( Pradushan Par Nibandh ) में , आज आप पढेंगे की प्रदूषण किसे कहते है ? और ये किस तरह से हमे नुक्सान पहुचाते है ? और इसे कम करने के उपाय क्या-क्या हैं ? इस पोस्ट ( Pradushan Par Nibandh ) को आप ध्यान से पढिएगा तो चलिए शुरू करते है |

Pradushan Par Nibandh

उपसंहार

अगर हमे अपनी आने वाली पीढ़ी को एक स्वस्थ, सुरक्षित एवं साफ़ सुथरा जीवनदायनी पर्यावरण देना है तो इसके लिए हमे कठोर कदम उठाने होंगे हमे हर टार हरियाली को विकसित करना होगा और अपनी प्रकृति को भी इस प्रदूषण से बचाए रखना होगा और प्रदूषण पर नियंत्रण पाना सिर्फ हमारे देश का ही नहीं पूरी दुनिया के लिए आवश्यक है ताकि समस्त पृथ्वी पर जीवन रह सके |

प्रदूषण पर निबंध

जैसे की दुनिया बढ़ते समय के साथ विकसित शहरीकरण को अपनाती जा रही है और हर जगह से हरियाली को खत्म करके नये शहरो और महानगरो में तब्दील हो रही है तो इन शहरो में नये कारखाने और आबादी का घनत्व बढ़ रहा हैं तो इन कारखानों से निकलने वाला धुँआ मोटर वाहनों से निकलने वाला धुँआ हमारे वातावरण में घुलकर हमे और हमारे वातावरण को प्रदूषित कर रहा है | और वायु, जल, मृदा आदि में ऐसे तत्व जो बहुत ही हानिकारक है वो तत्व घुलकर हमारे वातावरण को इस हद तक दूषित और गन्दा कर देते है की स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालने लगे तो उसे प्रदूषण कहते हैं |

प्रदूषण से हमारी इस पृथ्वी का संतुलन बिगड़ रहा है जिससे आने वाले समय में यह मानव जीवन के लिए और भी खतरनाक साबित हो सकता है | हमारे पर्यावरण के अंदर दूषित पदार्थो के मिलने से जो प्राकृतिक संतुलन में जो दोष उत्पन्न होता है वह प्रदूषण कहलाता है | इस प्रदूषण के कारण हमारे जीव-जन्तुओ और मानव जीवन को भी हानि हो रहा है और इसी कारण से प्राकृतिक आपदाए भी आ रही है |

प्रदूषण को प्राकृतिक एवं मानवीय कारणों के आधार पर दो भागो में बाँटा गया है |

प्राकृतिक प्रदूषण

प्राकृतिक प्रदूषण के अंदर वो क्रियाये शामिल है जो प्रकृति से उत्पन्न होते हुए भी प्राकृतिक प्रदूषण उत्पन्न करने ,में सहायक होती है अत: प्रकृति द्वारा उत्पन्न प्रदूषण बहुत घातक नही होती है और उनकी एक सीमा निश्चित होती है जैसे ज्वालामुखी, विस्फोट, प्राकृतिक आपदाए इत्यादि …

मानवीय प्रदूषण

मानवीय प्रदूषण ही वास्तव में प्रदूषण का मुख्य कारण हैं अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष सभी प्रदूषण मानव निर्मित ही है | जैसे जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण ,ध्वनि प्रदूषण,औघोगिक प्रदूषण, रासायनिक प्रदूषण, इत्यादि सभी मानव निर्मित प्रदूषण है |

प्रदूषण के प्रकार

  • वायु प्रदूषण
  • जल प्रदूषण
  • मृदा प्रदूषण
  • ध्वनि प्रदूषण

वायु प्रदूषण

जब वायुमंडल में बाहर से कई तरह के प्रदूषण तथा धूल, गैस और कई तरह के पदार्थ एकत्र हो जाते हैं जो मानव जीवन और उसके पर्यावरण के लिए नुक्सान दायक होता हैं और जब वायुमंडल में उपस्थित गैस की मात्रा एवं अनुपात में परिवर्तन होता है तो उसे वायु प्रदूषण कहते हैं वर्तमान में वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण मानव की विभिन्न गतिविधियों द्वारा वायु में छोड़ी गई गैस तथा अन्य हानिकारक पदार्थ है तथा औद्योगिक कारण जैसे घरो में ईंधन जलाने से, वाहनों के चलने से, और कृषि सम्बन्धी कार्यो से भी वायु प्रदूषित होती है |

जल प्रदूषण

जल के भौतिक तथा जैविक कारको में होने वाले हानिकारक परिवर्तनों को जल प्रदूषण कहते हैं | जल प्रदूषण तब होता है जब मानव अपने क्रियाकलापों से जल को प्रदूषित करता है और मानव इसमें बहुत ही अहम् भूमिका निभा रहा है मानव अपने द्वारा निर्मित कारखानों को लगाने से इनके अवशिष्ट पदार्थो को नदियों, नहरों, तालाबो आदि किसी अन्य स्रोतों में भा दिया जाता है जिससे जल में रहने वाले जीव एवं पौधों पर तो बुरा असर पड़ता ही है और साथ ही वह जल पीने के योग्य नहीं रहता है और प्रदूषित हो जाता है |

मृदा प्रदूषण

मृदा यानि मिटटी जो हमारी पृथ्वी की मूल सम्पदा है जिसके द्वारा ही सभी जीवो एवं पेड़ो एवं मनुष्यों का जीवन में अस्तित्व है क्योंकि मृदा के द्वारा ही कई प्रकार की खाद्य सामग्री उपजाई जाती है रासायनिक खादों, कीटनाशक दवाइयाँ और कारखानों एवं घरो से निकले कचरों आदि के इस्तेमाल से मिटटी प्रदूषित हो रही है जो पूरी तरह से भूमि की उर्वरता को नष्ट कर रहा है और स्वस्थ जीवन को बनाये रखने के लिए मिटटी का उर्वरक होना आवश्यक है |

ध्वनि प्रदूषण

अनियंत्रित, अत्यधिक तीव्र एवं असहनीय ध्वनि जो मानव के स्वास्थ पर कुप्रभाव डालती है ऐसे कर्कश ध्वनि को ध्वनि प्रदूषण कहते हैं। ध्वनि प्रदूषण की तीव्रता को ‘डेसीबल इकाई’ में मापा जाता है।..और मै आपको बता दूँ की 90 डेसीबल से अधिक ध्वनि,. ध्वनि प्रदूषण होती है |.मानवीय उपकरण ज्यादा इस्तेमाल होने के कारण ध्वनि प्रदूषण और भी तेजी से फ़ैल रहा है जैसे .आज के गाड़ियों से निकलने वाले तेज हॉर्न की आवाज़ तथा कारखानों से निकलने वाली आवाज ये भी एक प्रदूषण के कारक है |

सुधार के उपाय एवं निष्कर्ष

विभिन्न प्रकार के प्रदूषण से बचने के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने चाहिये और हरियाली की मात्र को और अधिक बढ़ाना होगा | सडको के किनारे पेड़ हो | और आबादी वाले क्षेत्रो में घनत्व को कम कर दिया जाए और उनसे कह दिया जाए क वो अपने घर पर एक पेड़ जरुर लगाये | और बड़े-बड़े कारखानों को आबादी वाले क्षेत्रो से दूर रखा जाए | और लीगो में जागरूकता फैलाई जाए जय हर साल पर्यावरण दिवस, जल दिवस, ओजोन दिवस, पृथ्वी दिवस आदि दिवस मनाये जाने चाहिये और हरियाली को बढोतरी देना होगा | और समय-समय पर पर्यावरण के बचाव के लिए स्कॉटहोम सम्मेलन, मॉट्रियल समझौता आदि होता रहना आवश्यक है तभी इस प्रदूषण से हमे कुछ हद तक राहत मिल पायेगा |

मुझे आशा है दोस्तों की आप को आज का ये पोस्ट ( Pradushan Par Nibandh ) पसंद आया होगा | यदि आपको मेरा यह पोस्ट( Pradushan Par Nibandh ) अच्छा लगा है और इससे आपको कुछ जानने को मिला है और लगता है यह जानकारी अन्य लोगो को भी मिलनी चाहिये तो इसे आप Social Media पर जरूर Share कीजिये जिससे इसकी जानकारी और भी लोगो को मिले और वो भी जान सके इसके बारे में….


यदि आपके मन में कोई सवाल है मेरी इस पोस्ट( Pradushan Par Nibandh ) से तो comment करके जरूर बताये मै उसका जवाब देने की पूरी कोशिश करूंगा …

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