Shabd kise kahate hain – educational dose .com

नमस्कार दोस्तों आज के पोस्ट shabd kise kahate hain में हमने बहुत विशेष टॉपिक का चयन कर हे दोस्तों आप इसे बचपन में पढ़ते हो परन्तु या आपके बड़े बड़े परीक्षा में पूछ लेता है जिसको देख कर आप परेशान हो जाते हो इसलिए मैने इस समस्या को दूर करने के लिए यह shabd kise kahate hain पोस्ट लिखा है जिससे आपकी सहयता मिल सके l

Shabd kise kahate hain – शब्द किसी कहते है | :-

जब एक या एक से अधिक वर्णो से बने हुए सार्थक ( ध्वनि ) शब्द कहलता है| या कह सकते है ऐसे शब्द जो पूर्ण स्वंत्रत हो शब्द कहलाते है | तथा किसी भी भाषा में वर्णो के बाद जो इकाई सबसे छोटी शब्द ही होती है और मूलत : शब्द वर्णो के मेल से बनता है |

जैसे :-

ज + ल = जल
प + ा + ल + न = पालन
न + ा + त + ा = नाता
म + ट + न = मटन
प + ि + त = पति

शब्द के कितने भेद होते है या कितने प्रकार के होते होते है |:-

दोस्तों हिंदी व्याकरण के माध्यम शब्द के भेद चार होते है| तथा चारो भेदो के माध्यम से शब्द बारह प्रकार के होते है |

1 .प्रयोग की दृस्टि से।
(क.) अविकारी शब्द
(ख.) विकारी शब्द

2 . अर्थ की दृस्टि से
(क.) निरर्थक शब्द
(ख.) सार्थक शब्द

3 . उत्पति की दृस्टि से
(क.) तद्भव शब्द
(ख.) तत्सम शब्द
(ग.) विदेशी शब्द
(घ.) संकर शब्द
(ङ.) देशज शब्द

4.व्युत्पत्ति की दृस्टि से
(क.) यौगिक शब्द
(ख.) योगरूढ़ शब्द
(ग.) रूढ़ शब्द .

1 .प्रयोग की दृस्टि से। :-

दोस्तों हमें पता होना चाहिए प्रयोग की दृस्टि से भेद दो प्रकार के होते है


(क.) अविकारी शब्द :- ऐसे शब्द जिनके काल, वचन ,लिंग,एवं कारक के अनुसार पूर्ण रूप परिवर्तित ना होता हो उसे , अविकारी शब्द कहते हैं। तथा ऐसे शब्दों का रूप सदैव वही बना होता है।
तथा अविकारी शब्द में विशेषण, क्रिया विस्मयादि बोधक, समुच्चय बोधक तथा सम्बन्ध बोधक आदि शब्द आते रहते है ।


(ख.) विकारी शब्द :- ऐसे शब्द जिनका वचन, लिंग, एवं काल कारक के अनुसार पूर्ण रूप परिवर्तित हो जाता हो , उसे विकारी शब्द कहते हैं। इनमे समस्त सर्वनाम, क्रिया ,विशेषण तथा संज्ञा, शब्द आते रहते हैं।

2 . अर्थ की दृस्टि से :-

जैसा की आपको पता है अर्थ की दृस्टि से भेदो से शब्द दो प्रकार के होते है l


(क.) निरर्थक शब्द:-ऐसे हिंदी शब्द जिनका का कोई अर्थ नहीं निकल सकता हो,तो ऐसे शब्द को निरर्थक शब्द कहलाते हैं।उदाहरण में निरर्थक शब्द – पट ,मच, लक,पट, अप , मक आदि ऐसे शब्द निरर्थक शब्द है ।


(ख.) सार्थक शब्द :- ऐसे हिंदी शब्दों का कुछ अर्थ निकल सकता हो , तो ऐसे शब्द को सार्थक शब्द कहलाते हैं।उदाहरण सार्थक शब्द – कंप्यूटर, शिक्षक,कलम, छात्र, विज्ञापन, आदि ऐसे शब्द सार्थक शब्द है ।

उत्पति की दृस्टि से :-

उत्पति की दृस्टि के माध्यम से शब्द पांच प्रकार के होते है l


(क.) तद्भव शब्द :-ऐसे शब्दों जिनका मूल रूप तो संस्कृत होता हैं परन्तु अभी तक वर्तमान समय में यह परिवर्तित होता हो तो ऐसे शब्द तद्भव शब्द कहलाते हैं।
उदाहरण में तद्भव शब्द – चीनी ,कछुआ,करोड़ , दिवाली , दिन आदि ऐसे शब्द तद्भव शब्द है ।

(ख.) तत्सम शब्द :-ऐसे शब्द जिनका मूल रूप से संस्कृत शब्द अपना रूप बदले बिना ही हिंदी भाषा में प्रयुक्त हो जाती हैं, तो ऐसे शब्द तत्सम शब्द कहलाते हैं।
उदाहरण में तत्सम शब्द के – श्रेया ,जंघा ,विवाह ,चक्र, तृण, आदि ऐसे शब्द तत्सम शब्द है ।

(ग.) विदेशी शब्द :- ऐसे शब्द जिनमे विदेशी भाषा के माध्यम से हिन्दी में आता हो तो ऐसे शब्द ही विदेशी शब्द कहलाते हैं। जैसे कुछ इस प्रकार है , पुर्तगाली अरबी, अंग्रेजी,फ्रांसीसी , तुर्की,पुर्तगाली तथा फारसी आदि भाषाओं ऐसे आते हैं तो ये शब्द प्रमुख होते है –
उदाहरण में विदेशी शब्द के– पेज , आवाज ,गरीब , ताला, मुगल, आदि ऐसे शब्द विदेशी शब्द है ।

(घ.) संकर शब्द :- ऐसे शब्द जो दो भाषाओं के योग से बने होते हो तो ऐसे शब्द संकर शब्द कहलाते हैं।
उदाहरण में संकर शब्द –
रेल (अंग्रेजी) + यात्री (संस्कृत) = रेलयात्री
डाक (हिन्दी) + खाना (अरबी) = डाकखाना
रक्त (संस्कृत) + दान (अरबी) = रक्तदान
मांग (हिन्दी) + पत्र (संस्कृत) = मांगपत्र
अश्रु (संस्कृत) + गैस (अंग्रेजी) = अश्रुगैस आदि।

(ङ.) देशज शब्द :- ऐसे शब्द जिनका का व्युत्पत्ति का पता नहीं चल पता है । तो ऐसे शब्द देशज शब्द कहलाते है ,तथा इनका कोई श्रोत नहीं होता है,और अक्सर ये अपने ही देश में बोलचाल से बने होते हैं।यही कारन है की इन्हें देशज शब्द कहते हैं।
उदाहरण में देशज शब्द – लौकी, तेंदुआ,भिन्डी,पटाखा,बम, सितारा, पगड़ी, चाँद आदि ऐसे शब्द देशज शब्द है ।

4.व्युत्पत्ति की दृस्टि से :- .

व्युत्पत्ति की दृस्टि से भेदो के माध्यम से शब्द तीन प्रकार के होते है l


(क.) यौगिक शब्द :- ऐसे शब्द जो दो या दो से अधिक शब्दों से बने होते हैं। तो ऐसे शब्दों का अपना कुछ पृथक अर्थ भी निकलते है परन्तु उनके कुछ अपने मूल अर्थ के अनुसार ही अतिरिक्त एक नए अर्थ का बोध करते हैं। समास,प्रत्यय, उपसर्ग एवं समस्त संधि, से बने हुए शब्द यौगिक शब्द कहते हैं।
उदाहरण में यौगिक शब्द – राष्ट्रपिता (राष्ट्र + पिता),अभिमान (अभि + मन ), पुस्तकालय (पुस्तक + आलय), ताजमहल (ताज + महल), विद्यालय (विद्या + आलय), अभिलाषा (अभि + लाषा ) आदि शब्द यौगिक शब्द है ।

(ख.) योगरूढ़ शब्द :- ऐसे शब्द जिनका निर्माण अलग – अलग अर्थ देने वाले शब्दों के योग से निकलता हो , परन्तु ये अपने अनेक अर्थों में से द्वारा प्रतिपादित में किसी एक विशेष अर्थ का ही प्रतिपादन करने के लिए रूढ़ हो जाता हैं।
उदाहरण में योगरूढ़ शब्द – , गणेश , नीर ,पीताम्बर, त्रिनेत्र, पंकज , नेत्र , आदि।

(ग.) रूढ़ शब्द :-ऐसे शब्द जो किसी स्थान, वस्तु , व्यक्ति, और प्राणी वर्षों के लिए प्रयुक्त होने के कारण किसी भी विशिस्ट अर्थ में प्रचलित कर लिए जाते है तो ऐसे शब्दों की निर्माण प्रक्रिया भी ज्ञात नहीं हो पति है तथा इसका कोई अन्य अर्थ भी नहीं होता है ।
उदाहरण में रूढ़ शब्द – चावल , देवता, गाय, आकाश, नर आदि शब्द रूढ़ शब्द है ।

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