Vriksharopan Nibandh In Hindi – Educational Dose

नमस्ते दोस्तों कैसे हैं आप, एक बार फिर से स्वागत आपका Educational Dose के इस नये पोस्ट ( Vriksharopan Nibandh In Hindi ) में , आज आप पढेंगे की वृक्षारोपण किसे कहते है ? और इससे हमे क्या-क्या लाभ मिलता है ? इस पोस्ट ( Vriksharopan Nibandh In Hindi ) को आप ध्यान से पढिएगा तो चलिए शुरू करते है |

प्रस्तावना

किसी छोटे पोधे को एक स्थान से निकालकर दूसरे स्थान पर स्थापित करने की प्रक्रिया को वृक्षारोपण कहते हैं | हमारे भारत देश की संस्कृति एवं सभ्यता वनों से ही विकसित हुई हैं | यह एक तरह से मानव के जीवन का साथी हैं  वृक्षारोपण के द्वारा ही हमारी प्रकृति का संतुलन बना रहता हैं | यदि वृक्ष न हो तो नदियों में न ही जल भरा रहेगा, और न ही सरिता कल-कल की निनाद से गुजेंगी | वृक्षों की जड़ से वर्षा का पानी धरती के धरास्थल में पहुँचता है, और यही जल स्त्रोतों में गमन करके हमे अपार जल प्रदान करता है | वृक्षारोपण मानवता का सांस्कृतिक दायित्व है, क्योंकि वृक्षों की वजह से हमारे जीवन का संतुलन बराबर रहता है | वृक्ष हमे जीवन में राहत एवं सुख चैन प्रदान करता है |

“” वृक्षों के बिना जीवन है अपूर्ण
वृक्षारोपण करके जीवन को करो परिपूर्ण ||””

संस्कृति एवं वृक्षारोपण

हमारे भारत देश की संस्कृति एवं सभ्यता वृक्षों तथा वनों की गोंद में ही विकसित  हुई हैं | यहाँ पर ही हमारे ऋषि मुनियों ने पेड़ो की ठंडी छाव में बैठकर मनुष्यों को ज्ञान का भंडार सौपा हैं | वैदिक ज्ञान के वैराग्य में, वन ग्रंथो का बहुत ही मत्वपूर्ण स्थान है | भूतकाल में गुरुकुल की स्थापना वनों के बीच में ही की गई थी | इन गुरुकुलो में मनुष्य दार्शनिक, अर्थशास्त्री एवं राष्ट्र निर्माण की शिक्षा को ग्रहण करते थे | इन्ही वनों से हमारे महाऋषियों ने मानव कल्याण के लिए कई प्रकार की खोज की, और यही क्रम अभी तक चला आ रहा है  फूलो का खिलना , नये पौधो का उगना ,पंक्षीयो का चहकना हर मनुष्य के मन को भाता है इसलिए वृक्षारोपण हमारी संस्कृति में ही निहित हैं |

वृक्षारोपण उपासना

हमारे भारत में वृक्ष को लगाने के साथ साथ इसकी पूजा भीं की जाती है वृक्षों में ऐसे कई वृक्ष है जिसे हिन्दू धर्म में भगवान का निवास स्थान भी माना गया है जैसे -नीम का पेड़ ,बरगद का पेड़, पीपल का पेड़ ,आवला आदि शास्त्रों के अनुसार पूजनीय माने जाते है, जिन वृक्षों को पूजते है वो औषधिया (दवाईयi )के लिए भी प्रयोग किया जाता है | जो हमे प्रत्येक रोगों से छुटकारा दिलाकर सेहत को बरकरार बनाये रखने में मदद करता है | भूतकालो (आदिकालो या पुराने समयों में) वृक्षों से ही मनुष्यो के भोजन की पूर्ति होती थी | वृक्ष के पास रहने से मनुष्य को मानसिक संतुलन तथा राहत मिलता है|

भगवान श्री कृष्ण गीता में कहते है –

“मूलतः ब्रम्हा रूपाय मध्यतो विष्णु रुपिन:
अग्रत: शिव रूपाय अश्र्व्याय नमो नम: “

अर्थात इसके मूल रूप में ब्रम्हा ,मध्य में विष्णु तथा अग्र में शिव का वास होता है ,इसी कारण अश्व्य्य नामधारी वृक्ष को नमन किया जाता है |

वनों से लाभ

  • वनों से हमे गृह निर्माण की सामग्री मिलती हैं |
  • वनों से हमे औषधियां, जड़ी बूटिया , घास गोंद और पशुओ का चारा भी मिलता है |
  • वन तापमान को सामान्य स्थिति बनाने में काफी सहायता करता है |
  • लकड़ी, फर्नीचर, कागज, दवाइया आदि के लिए मनुष्य वनों पर ही निर्भर हैं \
  • वन दूषित वायु को ग्रहण करके हमे स्व्च्छ एवं शुद्ध वायु प्रदान करता हैं |
  • जितना जरुरी हमारे लिए जल और वायु है उतना ही जरुरी वन भी है क्योंकि हम बिना ऑक्सीजन के जी नहीं सकते इसलिए हर मनुष्य को वृक्षारोपण करना चाहिये | हमे कई तरह से लाभ प्रदान करने वाले वृक्षों की रक्षा करनी चाहिये और यही हमारा धर्म एवं कर्तव्य हैं |

वनों के कटने से हानियां

आज के मनुष्य अपनी भौतिक प्रगति की तरफ अग्रसर है,वह अपनी इच्छाओ / स्वार्थ को पूरा करने के लिए बड़े ही जोर-शोर के साथ वृक्षों की कटाई कर रहा हैं | नये नये ओधोगिक विकास एवं जनसँख्या में वृद्धि के कारण वनों का क्षेत्रफल दिन ब दिन घटता ही जा रहा है | 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैले वनों को अकेले भारत में ही काटा जा रहा है | वृक्षों के काटने से पक्षियों के जीवन पर भी बहुत बुरा असर पड रहा है प्राकृतिक संतुलन को बनाये रखने में पंक्षियों का बहुत बड़ा योगदान है |

वृक्षों के काटने से अब कई प्रकार के पंक्षियों की जाति विलुप्त होती जा रही है, अगर इसी तरह से वृक्षों की कटाई होती रहेगी तो पंक्षियों के अस्तित्व पर एक प्रश्न चिन्ह लग जायेगा | वृक्षों के कटने से हमारे पर्यावरण पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड रहा है, बहुत से जीव- जंतु विलुप्त होने के कगार पर पहुँच चुके है | वृक्षों के कटने से ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या बढती जा रही है, जिसका सीधा असर हमारे मौसम पर दिखाई पड़ रहा है बिना मौसम के बरसात, सर्दी के दिनों में गर्म होते मौसम से साफ़ है की यदि पर्यावरण के प्रति सचेत नहीं हुए तो इसका परिणाम बहुत ही भयानक होगा |

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वृक्षारोपण  कार्यकर्म 

उपसंहार

हमारे भारत देश में वृक्षारोपण के लिए कई सारी संस्थाये, पंचायती राज संस्थाये ,  पंजीकृत संस्था, राज्य वन विभाग, कई समितिया  जो  वृक्षारोपण के लिए कार्य करती है| कुछ संस्थाओ में वृक्ष को गोंद लेने की प्रक्रिया भी शामिल हैं | हमारे बच्चो के पाठ्यक्रम में वृक्षारोपण का पाठ भी शामिल है हमे वृक्षों को लगाने के लिए लोगो को प्रोत्साहित करना चाहिये ,और आज हमे भी वृक्षारोपण का संकल्प लेने की जरुरत है |

वनों तथा वृक्षों की महत्वता को आज हमारे देशवासी एक स्वर में स्वीकार कर रहे है हमारे राष्ट्र की सबसे अनिवार्य आवश्यकता वन महोत्सव है ,हमारे वनों का हमारे देश की समृद्धि में बहुत बड़ा योगदान है इसलिए हमारे देश के ही नहीं बल्कि पुरे विश्व के लोगो को अपने लिए एवं अपनी आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ रखने के लिए एवं इस पृथ्वी को बचाने के लिए वृक्षारोपण करना बहुत ही आवश्यक है |

मुझे आशा है दोस्तों की आप को आज का ये पोस्ट ( Vriksharopan Nibandh In Hindi ) पसंद आया होगा | यदि आपको मेरा यह पोस्ट( Vriksharopan Nibandh In Hindi ) अच्छा लगा है, और इससे आपको कुछ जानने को मिला है, और लगता है यह जानकारी अन्य लोगो को भी मिलनी चाहिये तो इसे आप Social Media पर जरूर Share कीजिये जिससे इसकी जानकारी और भी लोगो को मिले और वो भी जाने वृक्षारोपण के महत्व के बारे में….


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